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साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की तबीयत बिगड़ी, मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी होने के अगले दिन अस्पताल में भर्ती

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की तबीयत बिगड़ी, मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी होने के अगले दिन अस्पताल में भर्ती
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल।  मालेगांव ब्लास्ट केस में गुरुवार को बरी हुईं भारतीय जनता पार्टी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की तबीयत शुक्रवार को अचानक बिगड़ गई। उन्हें मुंबई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। एनआईए की विशेष अदालत से  लंबे कानूनी संघर्ष के बाद मिली राहत के ठीक अगले दिन स्वास्थ्य बिगड़ने को लेकर उनके समर्थकों में चिंता है। बताया जा रहा है कि वे बीते कई वर्षों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं।

    कोर्ट से बरी होने के बाद भी गूंजता रहा "टॉर्चर" का आरोप

    गुरुवार को जब एनआईए की विशेष अदालत ने मालेगांव विस्फोट केस में सभी आरोपियों को बरी किया, तब साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने अपने बीते दिनों को याद करते हुए महाराष्ट्र एटीएस पर कस्टडी में टॉर्चर करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुझे 13 दिनों तक प्रताड़ित किया गया, मेरा जीवन बर्बाद कर दिया गया। इसके पहले भी, 6 नवंबर 2024 को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खराब तबीयत की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा था कि यदि जीवित रही तो कोर्ट अवश्य जाऊंगी।

    कांग्रेस सरकार और महाराष्ट्र ATS पर आरोप

    साध्वी प्रज्ञा ने पूर्व में कांग्रेस सरकार और महाराष्ट्र ATS पर आरोप लगाया था कि पूछताछ के नाम पर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस का टॉर्चर सिर्फ ATS कस्टडी तक ही नहीं, मेरे जीवन भर के लिए मृत्यु दाई कष्ट का कारण बन गया। उन्होंने ब्रेन में सूजन, दृष्टि और श्रवण में कमी, बोलने में असंतुलन, और स्टेरॉयड व न्यूरोलॉजिकल दवाओं से पूरे शरीर में सूजन जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का जिक्र किया।

    क्या है मालेगांव ब्लास्ट केस?

    29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में एक मस्जिद के पास धमाका हुआ था, जिसमें 6 लोगों की मौत और 101 लोग घायल हो गए थे। एक मोटरसाइकिल में विस्फोटक लगाए गए थे, जिसकी मालिकाना जानकारी लेकर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और अन्य पर आतंकवाद, हत्या और साजिश के आरोप लगे। मगर एनआईए कोर्ट के विशेष जज एके लाहोटी ने फैसले में कहा कि सिर्फ संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन यह सिद्ध नहीं कर सका कि मोटरसाइकिल ठाकुर के नाम थी।

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    Vaishnavi Mavar
    By Vaishnavi Mavar

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