घर बनवाना हुआ मंहगा!महंगाई की मार से बिल्डर परेशान; लोहा, सीमेंट और टाइल्स के दाम 20 से 30% बढ़े

इंदौर। बिल्डिंग मैटेरियल के दामों में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने से भवन निर्माण कारोबार प्रभावित हो रहा है। लोहा, सीमेंट, वायरिंग, टाइल्स और बाथरूम फिटिंग जैसी जरूरी सामान महंगा होने से कई प्रोजेक्ट घाटे में पहुंच गए हैं। बढ़ती लागत के कारण कई बिल्डर नए प्रोजेक्ट लेने से बच रहे हैं। वहीं, पानी के बढ़ते खर्च ने भी निर्माण कार्य को और महंगा बना दिया है।
पुराने एग्रीमेंट अब बन रहे घाटे का कारण
इंदौर के बिल्डर अमित पांडे ने बताया कि ज्यादातर निर्माण कार्य पहले तय रेट पर अनुबंध के आधार पर शुरू किए गए थे। शुरुआत में तय की गई कीमत पर ही ग्राहक से समझौता हो जाता है, लेकिन छह महीने तक चलने वाले निर्माण कार्य के दौरान सामग्री के दाम तेजी से बढ़ गए। इससे लागत अचानक बढ़ गई और कारोबारियों को सीधे नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कई बिल्डरों का कहना है कि पुराने बजट में अब प्रोजेक्ट पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है। लगातार बढ़ती महंगाई ने कारोबार की रफ्तार धीमी कर दी है।
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लोहा, सीमेंट और वायरिंग सामग्री के दामों में भारी उछाल
कंस्ट्रक्शन कारोबारियों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में निर्माण सामग्री के दामों में लगातार तेजी आई है। पहले जो लोहा 48 से 50 रुपए किलो मिलता था, वह अब 63 से 65 रुपए किलो तक पहुंच गया है। सीमेंट की बोरी 270 रुपए से बढ़कर 325 रुपए तक हो गई है। वायरिंग सामग्री में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले 1100 रुपए में मिलने वाला वायर का बंडल अब 1500 रुपए तक पहुंच चुका है, जिससे निर्माण लागत काफी बढ़ गई है।
टाइल्स और बाथरूम फिटिंग का खर्चा दोगुना
निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली टाइल्स और बाथरूम फिटिंग के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। पहले जो टाइल्स 45 रुपए प्रति फीट मिलती थीं, अब उनकी कीमत 55 रुपए प्रति फीट तक पहुंच गई है। वहीं, बाथरूम फिटिंग का खर्च भी लगभग दोगुना हो गया है। पहले जहां एक अच्छा बाथरूम करीब 60 हजार रुपए में तैयार हो जाता था, अब उसी पर एक लाख रुपए से अधिक खर्च आ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण ग्राहक भी नए निर्माण कार्य शुरू करने से बच रहे हैं।
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पानी का टैंकर हुआ महंगा
निर्माण कारोबार में पानी की बढ़ती कीमत भी बड़ी समस्या बनती जा रही है। अमित पांडे ने बताया कि एक साइट पर केवल पानी के टैंकरों पर ही एक महीने में करीब 30 हजार रुपए खर्च हो गए। शहर में एक पानी का टैंकर अब एक हजार रुपए तक पहुंच चुका है। बिना पानी के निर्माण कार्य संभव नहीं होने के कारण यह अतिरिक्त खर्च उठाना मजबूरी बन गया है। निर्माण कारोबारियों का कहना है कि यदि जल्द ही कीमतों में स्थिरता नहीं आई तो छोटे ठेकेदारों और स्थानीय बिल्डरों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।












