गड़े धन के लालच में दोस्त की बलि!गैरतगंज में विजय जैन हत्याकांड का चौंकाने वाला खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार
गैरतगंज। नगर के चर्चित विजय जैन हत्याकांड का पुलिस ने शव मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर खुलासा कर दिया। पुलिस के अनुसार यह हत्या गड़े धन (दफीना) को निकालने के लालच में तांत्रिक क्रियाओं और मानव बलि के अंधविश्वास के चलते की गई। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। एसडीओपी सोनाली गुप्ता ने बताया कि मुख्य आरोपी प्रहलाद साहू (64) निवासी हिनोतिया खास, उसका पुत्र टीकम साहू (34) तथा करीम खान (35) निवासी उड़दमऊ इस हत्याकांड में शामिल पाए गए हैं। पूरे मामले का खुलासा तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और पूछताछ के आधार पर हुआ।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार विजय जैन पहले से ही आरोपियों के साथ गड़े धन की तलाश में जुड़ा हुआ था। 7 जुलाई की शाम करीब 7:30 बजे प्रहलाद साहू के फोन आने पर विजय ने अपना मोबाइल बंद किया और प्रहलाद की मोटरसाइकिल से परासिया नदी की ओर रवाना हुआ। वहां पहले से टीकम साहू और करीम खान फावड़ा व कुल्हाड़ी लेकर मौजूद थे। पुलिस के मुताबिक परासिया नदी किनारे एक चबूतरे के पास प्रहलाद साहू ने तांत्रिक क्रियाएं शुरू कीं। अगरबत्ती जलाकर उसने कहा कि "धरती गर्म हो रही है, दफीना बलि मांग रहा है।" इसके बाद उसने दोनों साथियों को इशारा किया। आरोप है कि करीम खान ने कुल्हाड़ी से विजय जैन की गर्दन पर वार किया, जबकि प्रहलाद और टीकम ने उसे पकड़ रखा था। मृत्यु होने के बाद तीनों आरोपियों ने घटनास्थल से करीब 100 मीटर दूर नदी किनारे गड्ढा खोदकर शव दफना दिया और फरार हो गए।
तकनीकी साक्ष्यों से खुली परतें
विजय जैन की गुमशुदगी के बाद पुलिस लगातार जांच में जुटी थी। कॉल डिटेल में सामने आया कि घटना वाले दिन विजय की सबसे अधिक बातचीत प्रहलाद साहू से हुई थी। प्रारंभिक पूछताछ में प्रहलाद ने मकान बिक्री के संबंध में बातचीत होने की बात कहकर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी रखी। सोमवार, 13 जुलाई को शव मिलने के बाद पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, जिसमें प्रहलाद और करीम ने पूरा घटनाक्रम स्वीकार कर लिया। इसके बाद हत्या का मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी, फावड़ा, मोटरसाइकिल तथा तीनों के मोबाइल फोन जब्त किए हैं। मृतक विजय जैन का अंतिम संस्कार भोपाल में किया गया, जहां उनका परिवार निवास करता है।
इन पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई में हुआ खुलासा
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी डीपी लोहिया, बेगमगंज निरीक्षक राजीव उइके, उपनिरीक्षक सुनंदा खरे, सहायक उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह, काफिला शेख, संतोष गीद, गणेश चोरसे, प्रधान आरक्षक राजवीर सिंह, सुनील पठारिया, ललन, राहुल चोरसे, नवीन पांडे, आरक्षक भरत दांगी, सौरभ राजपूत, अमित बोहरे, विकलेश सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अब भी कई सवाल बाकी
- पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन यह मामला कई अनसुलझे सवाल भी छोड़ गया है।
- यदि हत्या का उद्देश्य गड़ा धन निकालना था, तो हत्या के बाद वहां खुदाई क्यों नहीं की गई?
- आरोपी अपने साथ फावड़ा और कुल्हाड़ी तो लाए, लेकिन खुदाई के लिए आवश्यक अन्य उपकरण क्यों नहीं थे?
- स्थानीय चर्चाओं के अनुसार तांत्रिक मान्यताओं में बलि के लिए शारीरिक रूप से पूर्ण व्यक्ति को चुना जाता है, जबकि विजय जैन एक आंख से दिव्यांग थे।
- बताया जाता है कि विजय जैन संपन्न परिवार से थे। ऐसे में वे गड़े धन के लालच में कैसे और क्यों आए?
- सूत्रों के अनुसार विजय जैन के पिता ताराचंद जैन ने वर्षों तक व्यापारियों को बड़ी मात्रा में ब्याज पर धन दिया था तथा उनके पास सोना-चांदी और नकदी होने की चर्चा रही। हालांकि विजय की मृत्यु के बाद ऐसी भी जानकारी सामने आई कि उनके घर में अब वैसी संपत्ति नहीं मिली। इस संबंध में भी तरह-तरह की चर्चाएं बनी हुई हैं।
Edited By- Aakash Waghmare














