
आप के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर बड़ा सियासी संकट खड़ा कर दिया है। इनमें से तीन सांसदों ने बीजेपी जॉइन कर ली, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के बयान के बाद संकेत मिल रहे हैं कि आगे और भी बड़े बदलाव हो सकते हैं।
आम आदमी पार्टी के भीतर अचानक आई इस बगावत ने सभी को चौंका दिया है। राज्यसभा के सात सांसदों ने सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इन नेताओं में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल और अशोक मित्तल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि पार्टी के अंदर लंबे समय से असंतोष पनप रहा था। एक साथ इतने बड़े स्तर पर इस्तीफे ने AAP की संगठनात्मक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकार इसे पार्टी के लिए गंभीर संकट मान रहे हैं। आने वाले समय में इसका असर और स्पष्ट हो सकता है।
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पार्टी छोड़ने के बाद तीन सांसदों ने बिना देर किए बीजेपी का दामन थाम लिया। यह कदम इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा अहम बना देता है। बाकी चार सांसदों ने भी संकेत दिए हैं कि वे जल्द ही अपना अगला फैसला ले सकते हैं। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा को फायदा होगा या नहीं ये तो बाद की बात है, लेकिन विपक्ष इसे लेकर भाजपा पर आरोप भी लगा रहा है विपक्ष का कहना है कि वह दूसरी पार्टियों में सेंध लगा रही है। वहीं भाजपा इसे नेताओं का स्वैच्छिक निर्णय बता रही है। इससे राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है।
पश्चिम बंगाल के बारानगर में रोड शो के दौरान भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस पूरे मामले पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, 'अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है, आगे आगे देखिए होता है क्या।' उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसे AAP में और बड़े टूट के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आने वाले दिनों में और नेता भी पाला बदल सकते हैं। इस बयान ने विपक्ष की चिंताएं बढ़ा दी हैं। साथ ही यह संकेत भी दिया है कि सियासत में अभी और हलचल बाकी है।
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इस घटनाक्रम का असर पंजाब की राजनीति पर भी पड़ सकता है, जहां आप की सरकार है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह बगावत पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा है। वह विधायकों के साथ जाकर अपना पक्ष रखेंगे और बीजेपी में शामिल हुए सांसदों के रिकॉल की मांग करेंगे। इससे साफ है कि मामला अब संवैधानिक स्तर तक पहुंच सकता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।