ब्रिक्स प्रतिनिधियों को भाया ग्रामीण हाट:राजवाड़ा में देखा देवी अहिल्या के सुशासन का मॉडल, विदेशी मेहमानों ने सराहा मध्यप्रदेश की कृषि और ग्रामीण संस्कृति

ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में शामिल विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों और विदेशी मेहमानों ने इंदौर के प्रसिद्ध ग्रामीण हाट का भ्रमण कर मध्यप्रदेश की कृषि विविधता, ग्रामीण उद्यमिता और पारंपरिक विरासत को करीब से देखा। मालवी परंपरा के अनुसार पगड़ी पहनाकर उनका स्वागत किया गया, जबकि जनजातीय कलाकारों के लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मेहमानों का मन मोह लिया। विदेशी प्रतिनिधियों ने ग्रामीण हाट में प्रदर्शित स्थानीय उत्पादों, जैविक खेती और पारंपरिक कृषि मॉडल की जमकर सराहना की।

एक जिला-एक उत्पाद मॉडल ने खींचा ध्यान
ग्रामीण हाट में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) के तहत लगाए गए स्टॉल विदेशी प्रतिनिधियों के आकर्षण का केंद्र रहे। बुरहानपुर के केले से तैयार चिप्स, कुकीज़ और केले के रेशों से बने वस्त्रों को देखकर मेहमान काफी प्रभावित नजर आए। प्रतिनिधियों ने स्थानीय उत्पादकों से बातचीत कर उत्पादन प्रक्रिया और वैल्यू एडिशन मॉडल की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि इस तरह के मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सुंदरजा आम और चिन्नौर चावल का स्वाद लिया
रीवा के GI टैग प्राप्त सुंदरजा आम सहित विभिन्न किस्मों के आमों का स्वाद लेकर विदेशी मेहमान अभिभूत नजर आए। वहीं बालाघाट के प्रसिद्ध GI टैग प्राप्त चिन्नौर चावल की खुशबू और गुणवत्ता ने भी प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया। आमों की मिठास और खुशबू की मेहमानों ने खुलकर तारीफ की।

मिलेट क्वीन लहरी बाई का बीज बैंक बना आकर्षण
मंडला जिले की ‘मिलेट क्वीन’ लहरी बाई द्वारा संरक्षित दुर्लभ श्रीअन्न बीजों का संग्रह ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अलावा झाबुआ की पारंपरिक फसलें, नीमच की औषधीय खेती, नरसिंहपुर का पारंपरिक गुड़ और प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों में भी विदेशी प्रतिनिधियों ने गहरी रुचि दिखाई।
हस्तशिल्प और वस्त्रों की हुई जमकर सराहना
मृगनयनी के चंदेरी, महेश्वरी और कोसा वस्त्रों के साथ बाघ प्रिंट और गोंड चित्रकला को भी विदेशी मेहमानों ने काफी पसंद किया। प्रकृत सिल्क के तसर और मलबरी सिल्क परिधान तथा हेम्प क्लोदिंग के पर्यावरण-अनुकूल कपड़ों ने भी उनका ध्यान खींचा। कई प्रतिनिधियों ने स्मृति स्वरूप स्थानीय उत्पादों की खरीदारी भी की।
ग्रामीण जीवनशैली और स्थानीय व्यंजनों का अनुभव
ग्रामीण हाट में पारंपरिक खाटों पर बैठकर प्रतिनिधियों ने मालवी व्यंजनों का स्वाद लिया। इस दौरान उन्हें शुद्ध शहद, ए-2 दुग्ध उत्पाद, हर्बल उत्पाद और गोबर से बने पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की जानकारी भी दी गई। विदेशी मेहमानों ने ग्रामीण जीवनशैली को बेहद अनोखा और आत्मनिर्भर मॉडल बताया।

राजवाड़ा में देखा देवी अहिल्या का सुशासन मॉडल
ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के तहत इंदौर पहुंचे विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक राजवाड़ा का भी भ्रमण किया। इथियोपिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया सहित कई देशों के प्रतिनिधियों का मालवी परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया। राजवाड़ा के गणेश हॉल, दरबार हॉल और अन्य हिस्सों की भव्य स्थापत्य कला और नक्काशी ने मेहमानों को प्रभावित किया।
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होलकर काल की जैविक खेती पर हुई चर्चा
इतिहासकारों ने विदेशी प्रतिनिधियों को बताया कि होलकर शासनकाल में कम्पोस्ट आधारित जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाता था। कृषि अवशेष, गोबर, राख और जैविक कचरे से खाद तैयार करने की यह पद्धति आज भी प्रासंगिक मानी जाती है। प्रतिनिधियों को यह भी बताया गया कि इस मॉडल का उल्लेख कृषि वैज्ञानिक सर अल्बर्ट हावर्ड ने अपने अध्ययन में किया था।
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देवी अहिल्याबाई के सुशासन की जानकारी दी गई
प्रतिनिधियों को होलकरकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, जनगणना प्रणाली, दरबारी परंपराओं और सामाजिक संरचना की जानकारी दी गई। साथ ही पुण्यश्लोका देवी अहिल्याबाई होलकर के लोककल्याणकारी कार्यों, सुशासन और सामाजिक योगदान पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। भ्रमण के दौरान मेहमानों ने महेश्वरी साड़ियों की विशेषताओं को जाना, मालवी व्यंजनों का स्वाद लिया और राजवाड़ा परिसर में सामूहिक छायाचित्र भी खिंचवाए।












