तीन गोलियां लगीं, लेकिन नहीं छोड़ा मोर्चा : रीवा के लाल संजय तिवारी को मिला शौर्य चक्र, रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत

रीवा के सपूत संजय तिवारी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया है। आतंकियों से लड़ते वक्त संजय को तीन गोलियां लगी थीं, लेकिन उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा था। शौर्य चक्र प्राप्त करने के बाद गृहनगर लौटे संजय तिवारी का रेलवे स्टेशन पर जोरदार स्वागत किया गया।
रीवा के लाल संजय तिवारी को मिला शौर्य चक्र, रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत

रीवा। गोलियां शरीर को घायल कर सकती हैं, लेकिन हौसलों को नहीं। यह साबित कर दिखाया है रीवा के वीर सपूत संजय तिवारी ने। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान तीन गोलियां लगने के बावजूद उन्होंने अपनी पोजीशन नहीं छोड़ी और लश्कर-ए-तैयबा के एक खूंखार आतंकी को ढेर करने में अहम भूमिका निभाई। उनकी इसी असाधारण वीरता के लिए राष्ट्रपति ने उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार शौर्य चक्र से सम्मानित किया है।

तिरंगा और फूलमालाएं लेकर पहुंचे लोग

राष्ट्रपति भवन में सम्मान प्राप्त करने के बाद जब संजय तिवारी अपने गृह क्षेत्र रीवा पहुंचे तो रेलवे स्टेशन पर उनका स्वागत किसी नायक की तरह हुआ। फूल-मालाओं, तिरंगों और भारत माता के जयकारों के बीच लोगों ने अपने वीर बेटे का अभिनंदन किया। स्टेशन परिसर में मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में गर्व साफ दिखाई दे रहा था।

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आतंकियों से आमना-सामना, फिर शुरू हुई जंग

नवंबर 2024 में जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ की टीम एक विशेष आतंकवाद विरोधी अभियान पर निकली थी। इसी दौरान जवानों का सामना लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों से हो गया। आतंकियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में संजय तिवारी अग्रिम मोर्चे पर डटे रहे। मुठभेड़ के दौरान उन्हें एक के बाद एक तीन गोलियां लगीं, लेकिन उन्होंने न तो अपनी पोजीशन छोड़ी और न ही ऑपरेशन से पीछे हटे। घायल अवस्था में भी वे आतंकियों पर लगातार नजर बनाए रहे और जवाबी कार्रवाई का हिस्सा बने रहे। उनकी बहादुरी और सूझबूझ के चलते सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली।

दर्द से बड़ा था देश का कर्तव्य

सामान्य परिस्थितियों में तीन गोलियां लगने के बाद किसी भी व्यक्ति का खड़ा रह पाना मुश्किल होता है, लेकिन संजय तिवारी ने दर्द को अपने कर्तव्य के आड़े नहीं आने दिया। साथियों के अनुसार, गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उनका पूरा ध्यान ऑपरेशन को सफल बनाने पर था। यही कारण है कि उनके इस साहसिक योगदान को पूरे देश ने सलाम किया और उन्हें शौर्य चक्र से नवाजा गया।

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राष्ट्रपति भवन से रीवा तक सम्मान की गूंज

नई दिल्ली में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति ने संजय तिवारी को शौर्य चक्र प्रदान किया। सम्मान मिलने के बाद जैसे ही वे रीवा पहुंचे, रेलवे स्टेशन पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। सामाजिक संगठनों, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया। "भारत माता की जय" और "वंदे मातरम्" के नारों से पूरा स्टेशन गूंज उठा। कई लोगों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और युवाओं ने उन्हें अपना आदर्श बताया। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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