MP High Court :भोपाल के स्लॉटर हाउस में तालाबंदी के मामले पर करो विचार

जबलपुर। भोपाल में नगर निगम द्वारा पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर बने स्लाटर हाउस को सील करने को चुनौती देने वाली याचिका का हाईकोर्ट ने निराकरण कर दिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की वेकेशन बेंच ने निगमायुक्त को कहा है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार करें। इसके लिए हाईकोर्ट ने निगमायुक्त को 15 दिनों का समय दिया है।
आरोप : वैधानिक प्रक्रिया अपनाए बिना बंद किया
लाइव स्टॉक फूड प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर असलम कुरैशी की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया था कि राजधानी में पीपीपी मॉडल के तहत एक आधुनिक स्लाटर हाउस खोला गया था, जिसमें खुद नगर निगम पार्टनर था। याचिका में आरोप था कि निगम ने ही तानाशाही रवैया अपनाते हुए इस पूरे प्रोजेक्ट को तबाह करके उस पर 24 जनवरी 2026 को तालाबंदी कर दी। याचिका में आरोप था कि नगर निगम ने इस पूरी कार्रवाई में 'कन्सेशन एग्रीमेंट' (रियायत समझौते) की शर्तों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। समझौते के तहत किसी भी प्रकार की चूक या डिफॉल्ट की स्थिति में कार्रवाई और टर्मिनेशन (समाप्ति) की एक विस्तृत वैधानिक प्रक्रिया तय की गई थी। लेकिन नगर निगम ने इस निर्धारित प्रक्रिया को पूरी तरह बायपास करते हुए मनमाने ढंग से रातों-रात पूरे प्लांट को सील कर दिया, जिससे चलता-फिरता वैध व्यवसाय अचानक ठप हो गया।
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वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा
याचिका में दावा किया गया था कि अचानक हुई इस सीलिंग के कारण याचिकाकर्ता को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर इस आधुनिक प्लांट में काम करने वाले कई कर्मचारी और मजदूर रातों-रात बेरोजगार हो गए हैं। इस बारे में नगर निगम को दिए गए आवेदन पर कोई कार्रवाई न होने पर यह याचिका दायर की गई।
15 दिन में करें निराकरण
मामले में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पीयूष तिवारी, राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली और भोपाल नगर निगम की ओर से अधिवक्ता एसएम गुरु ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद मामले का निराकरण करते हुए अदालत ने नगर निगम को 15 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के आवेदन का निराकरण करने के आदेश दिए।
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