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कार्डियो या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग... कौन-सी एक्सरसाइज बेस्ट?रिसर्च में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की 30 साल लंबी स्टडी में खुलासा हुआ है कि सप्ताह में 90 से 120 मिनट स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और नियमित कार्डियो एक्सरसाइज का संयोजन सबसे ज्यादा फायदेमंद है। इससे हृदय रोग, अल्जाइमर और समय से पहले मौत का खतरा कम हो सकता है। जानिए रिसर्च के अहम निष्कर्ष।
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रिसर्च में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे

फिटनेस को लेकर लंबे समय से यह बहस चल रही है कि बेहतर स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए कार्डियो एक्सरसाइज ज्यादा फायदेमंद है या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग। अब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक बड़ी स्टडी ने इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की है।

30 साल तक चली बड़ी रिसर्च

ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित इस स्टडी में 1.47 लाख से ज्यादा वयस्कों की स्वास्थ्य स्थिति और उनकी एक्सरसाइज की आदतों का लगभग 30 वर्षों तक अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि अलग-अलग प्रकार की एक्सरसाइज का हृदय रोग, कैंसर, दिमागी बीमारियों और मृत्यु दर पर क्या प्रभाव पड़ता है।

कितनी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग है सबसे फायदेमंद?

रिसर्च के अनुसार, सप्ताह में 90 से 120 मिनट यानी करीब डेढ़ से दो घंटे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना सबसे ज्यादा लाभदायक माना गया। इससे अधिक समय तक एक्सरसाइज करने पर अतिरिक्त फायदे बहुत कम देखने को मिले।

स्टडी में पाया गया कि जो लोग हर सप्ताह लगभग दो घंटे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते थे, उनमें किसी भी कारण से मृत्यु का खतरा 13 प्रतिशत तक कम था। वहीं हृदय रोग से मौत का जोखिम 19 प्रतिशत और अल्जाइमर जैसी दिमागी बीमारियों से मृत्यु का खतरा 27 प्रतिशत तक कम देखा गया।

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सबसे ज्यादा फायदा किसे मिला?

शोधकर्ताओं के मुताबिक, केवल कार्डियो या केवल स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने वालों की तुलना में सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिला जिन्होंने दोनों तरह की एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में शामिल किया। स्टडी के अनुसार, नियमित कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का संतुलित संयोजन समय से पहले मृत्यु के जोखिम को 58 प्रतिशत तक कम कर सकता है।

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग क्यों है जरूरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। इस स्थिति को सारकोपेनिया कहा जाता है। इसके कारण कमजोरी, गिरने का खतरा, धीमा मेटाबॉलिज्म और दैनिक काम करने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ हड्डियों की मजबूती बढ़ाने, ब्लड शुगर नियंत्रित रखने और इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने में भी मदद करती है। इससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी कम हो सकता है।

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कौन-कौन सी एक्सरसाइज आती हैं स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में?

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में कई तरह की गतिविधियां शामिल होती हैं, जैसे-

  • डंबल और वेट ट्रेनिंग
  • रेजिस्टेंस बैंड एक्सरसाइज
  • बॉडीवेट वर्कआउट
  • योग
  • पिलाटीज
  • कुछ कठिन बागवानी गतिविधियां

विशेषज्ञों का मानना है कि तीव्रता से ज्यादा जरूरी नियमित रूप से व्यायाम करना है।

कार्डियो या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, क्या चुनें?

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की इस स्टडी का निष्कर्ष साफ है कि बेहतर स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों जरूरी हैं। किसी एक को चुनने के बजाय दोनों का संतुलित मिश्रण अपनाना सबसे अधिक फायदेमंद हो सकता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सप्ताह में लगभग दो घंटे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और नियमित कार्डियो एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है और स्वास्थ्य बेहतर बना रह सकता है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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