डिलीवरी बॉय, पैटरनिटी लीव और 28 दिन रिचार्ज!राघव चड्ढा के वो एजेंडे सोशल मीडिया पर हुए ट्रेंड

दिलचस्प बात ये है कि जिन मुद्दों पर राघव चड्ढा ने संसद में आवाज उठाई चाहे पितृत्व अवकाश हो, एयरपोर्ट पर महंगाई, महिलाओं की स्वच्छता या आम लोगों के रोजमर्रा के खर्च वही उन्हें जनता के बीच अलग पहचान देते हैं। उन्होंने उन विषयों को सामने रखा, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
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राघव चड्ढा के वो एजेंडे सोशल मीडिया पर हुए ट्रेंड
Raghav Chadha

राजनीति की गलियों में इन दिनों एक नाम लगातार चर्चा में है राघव चड्ढा। उनकी पहचान सिर्फ राजनीति से नहीं, बल्कि उन मुद्दों से बनी है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी को छूते हैं। पितृत्व अवकाश से लेकर एयरपोर्ट की महंगाई, महिलाओं की स्वच्छता से लेकर रोजमर्रा के खर्च उन्होंने उन बातों को आवाज दी, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। 

पितृत्व अवकाश: सिर्फ मां नहीं, पिता की भी जिम्मेदारी

राघव चड्ढा ने संसद में एक ऐसा मुद्दा उठाया, जिस पर अक्सर कम बात होती है पितृत्व अवकाश। उन्होंने मांग की कि भारत में पेड पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाया जाए।

उनका कहना था कि बच्चे की देखभाल सिर्फ मां की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। पिता को भी उतना ही समय और सहयोग मिलना चाहिए ताकि वे अपने परिवार के साथ रह सकें। उन्होंने संसद में कहा कि जब बच्चा जन्म लेता है तो बधाई दोनों को मिलती है, लेकिन जिम्मेदारी का बोझ ज्यादातर मां पर ही डाल दिया जाता है।

एयरपोर्ट पर महंगा खाना: आम आदमी के बजट की बात

हवाई यात्रा आज भले ही आम हो गई हो, लेकिन एयरपोर्ट पर मिलने वाला खाना अभी भी कई लोगों के लिए महंगा सौदा है। राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को भी संसद में उठाया।

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उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट पर चाय और समोसा जैसी चीजें इतनी महंगी होती हैं कि आम आदमी के लिए ये लग्जरी बन जाती हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या एयरपोर्ट पर किफायती खाना उपलब्ध नहीं कराया जा सकता?

इस मुद्दे के उठने के बाद कई एयरपोर्ट्स पर सस्ते खाने के आउटलेट शुरू किए गए, जहां यात्रियों को बजट में खाना मिलने लगा। हालांकि, उनकी अपनी पार्टी के कुछ नेताओं ने इसे ‘हल्का मुद्दा’ भी बताया, लेकिन जनता के बीच इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला।

मासिक धर्म स्वच्छता: स्वास्थ्य ही नहीं, सम्मान का सवाल

महिलाओं से जुड़ा एक बेहद जरूरी मुद्दा- मासिक धर्म स्वच्छता भी राघव चड्ढा ने संसद में उठाया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि समानता का भी मुद्दा है।

उन्होंने बताया कि देश में आज भी कई महिलाएं और लड़कियां साफ-सफाई के साधनों से वंचित हैं। इसका असर उनकी पढ़ाई और सेहत दोनों पर पड़ता है। कई लड़कियां सिर्फ इसी वजह से स्कूल नहीं जा पातीं।

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राघव ने सरकार से मांग की कि इस दिशा में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और जागरूकता अभियान चलाए जाएं। उनके इस बयान के बाद इस मुद्दे पर देशभर में चर्चा तेज हुई।

‘10 मिनट डिलीवरी’ का दबाव: जान जोखिम में डालते युवा

आज के डिजिटल दौर में तेजी ही सब कुछ है। लेकिन इसी तेजी की कीमत कौन चुका रहा है? राघव चड्ढा ने इस सवाल को संसद में उठाया।
उन्होंने क्विक डिलीवरी कंपनियों की ‘10 मिनट में डिलीवरी’ जैसी सेवाओं को खतरनाक बताया। उनका कहना था कि इतनी कम समय सीमा में काम पूरा करने के दबाव में डिलीवरी बॉय ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं और अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि एक खराब रेटिंग उनके पूरे महीने की कमाई पर असर डालती है। राघव ने इन वर्कर्स के लिए बीमा और सुरक्षित कामकाजी माहौल की मांग की। इस मुद्दे के बाद कई कंपनियों ने अपनी पॉलिसी पर दोबारा विचार किया।

28 दिन वाला रिचार्ज प्लान: ‘छुपा हुआ खर्च’ 

मोबाइल हर किसी की जरूरत बन चुका है, लेकिन उसके रिचार्ज प्लान पर भी राघव चड्ढा ने सवाल उठाए। उन्होंने 28 दिन वाले प्लान को ‘घोटाला’ बताया।

उनका तर्क था कि साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन 28 दिन के हिसाब से लोगों को 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है। यानी बिना बताए एक अतिरिक्त खर्च लोगों पर डाल दिया जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि रिचार्ज खत्म होने के बाद इनकमिंग कॉल बंद करना गलत है। इससे इमरजेंसी में लोग संपर्क नहीं कर पाते और जरूरी मैसेज भी नहीं मिलते। उन्होंने मांग की कि रिचार्ज प्लान 30 या 31 दिन के होने चाहिए और इनकमिंग कॉल कम से कम एक साल तक फ्री रहनी चाहिए।

कपल्स की टैक्स फाइलिंग: शादीशुदा जोड़ों को राहत

राघव चड्ढा ने एक और अहम सुझाव देते हुए कहा कि विवाहित जोड़ों को इनकम टैक्स रिटर्न संयुक्त रूप से फाइल करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि इससे मिडिल क्लास परिवारों पर टैक्स का बोझ कम होगा और उन्हें आर्थिक रूप से राहत मिलेगी।
उन्होंने ‘मैरिज बोनस’ पर जोर देते हुए कहा कि अगर पति-पत्नी को एक इकाई के रूप में टैक्स देने का विकल्प मिले, तो कुल टैक्स देनदारी कम हो सकती है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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