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Ratan Tata no more: भारत ने खोया अनमोल 'रतन' शाम 4 बजे तक कर सकेंगे अंतिम दर्शन, राजकीय सम्मान से होगी अंत्येष्टि

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Ratan Tata no more: भारत ने खोया अनमोल 'रतन' शाम 4 बजे तक कर सकेंगे अंतिम दर्शन, राजकीय सम्मान से होगी अंत्येष्टि

मुंबई। दिग्गज उद्योगपति और टाटा समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा का 86 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने मुंबई में अंतिम सांस ली। इससे पहले वे सोमवार को स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे। बाद में उन्होंने ही आईसीयू में भर्ती होने के दावों का खंडन कर दिया था। हालांकि, बुधवार को उन्हें एक बार फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनका निधन हो गया। रतन टाटा ने मार्च 1991 से दिसंबर 2012 तक नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाली कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में टाटा समूह का नेतृत्व किया। टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को हुआ था। वे टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा के दत्तक पोते नवल टाटा के पुत्र थे।

हर्ष गोयनका ने रात 11.24 बजे सोशल मीडिया पर लिखा-घड़ी की टिक-टिक बंद हुई रतन टाटा ने बुधवार(9 अक्टूबर) देर रात करीब 11 बजे अंतिम सांस ली। वे मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल की इंटेसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती थे। वे उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। रतन टाटा के निधन की खबर जाने-माने उद्योगपति हर्ष गोयनका ने दी। उन्होंने रात 11:24 बजे सोशल मीडिया पर लिखा था, ‘घड़ी की टिक-टिक बंद हो गई। टाइटन नहीं रहे। रतन टाटा ईमानदारी, नैतिक नेतृत्व और परोपकार के प्रतीक थे।' सूत्रों के मुताबिक रात करीब 2 बजे रतन टाटा का पार्थिव शरीर अस्पताल से घर ले जाया गया। उनका पार्थिव शरीर 10 अक्टूबर की सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक साउथ मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स के हॉल में दर्शनों के लिए रखा जाएगा। रतन टाटा का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा।

सादगी, सरलता और परोपकार के लिए प्रसिद्ध

रतन टाटा अपनी सादगी और सरल स्वभाव और समूह की परोपकारी नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध रहे। उदारीकरण के दौर में टाटा समूह आज जिन ऊंचाइयों पर है, उसे यहां तक पहुंचाने में रतन टाटा बहुत बड़ा योगदान है।

हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से की पढ़ाई

रतन टाटा ने स्कूली पढ़ाई-लिखाई मुंबई से की। इसके बाद वे कॉर्नेल यूनिवर्सिटी चले गए, जहां से उन्होंने आर्किटेक्चर में बीएस किया। रतन टाटा 1961-62 में टाटा ग्रुप जुड़े थे। इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस मैनेजमेंट प्रोग्राम से प्रबंधन की पढ़ाई की।

नैनो से लेकर जगुआर तक याद किए जाएंगे

भारत में पहली बार पूरी तरह बनी कार टाटा इंडिका का उत्पादन शुरू करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। उनके नेतृत्व में ही टाटा समूह ने लैंड रोवर और जगुआर का अधिग्रहण कर दुनिया भर को चौंका दिया था।

People's Reporter
By People's Reporter

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