रैपिडो के खिलाफ 1 अक्टूबर को ऑटो चालक करेंगे प्रदर्शन:परिवहन विभाग को ज्ञापन, कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन

इंदौर। शहर की सड़कों पर बढ़ती रैपिडो बाइक टैक्सी को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। बाइक टैक्सी के संचालन का विरोध कर रहा इंदौर ऑटो रिक्शा चालक महासंघ अब सड़क पर उतरने की तैयारी में है। महासंघ ने 1 अक्टूबर को शाम 4:30 बजे पलासिया स्थित पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से शिकायत और आंदोलन के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से अब विरोध तेज किया जाएगा।
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2019 से विरोध, फिर भी नहीं थमा बाइक टैक्सी का संचालन
ऑटो महासंघ के पदाधिकारियों के मुताबिक, शहर में रैपिडो बाइक टैक्सी के संचालन के खिलाफ 2019 से लगातार आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। महासंघ का आरोप है कि शिकायतों और पूर्व में किए गए आंदोलनों के बावजूद शहर में बड़ी संख्या में बाइक टैक्सी संचालित हो रही हैं।महासंघ के शहर अध्यक्ष निलेश सूर्यवंशी और पंकज मालवीय ने कहा कि इस बार आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। पहले पुलिस और परिवहन विभाग को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की जाएगी। यदि मांगों पर अमल नहीं हुआ तो संगठन उग्र आंदोलन करेगा।
निजी वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल का आरोप
महासंघ ने आरोप लगाया है कि शहर में चल रही कई बाइक टैक्सियों में ऐसे दोपहिया वाहन भी शामिल हैं, जो निजी यानी डोमेस्टिक श्रेणी में पंजीकृत हैं और उनका व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। संगठन ने इस तरह के संचालन पर सवाल उठाते हुए परिवहन विभाग से जांच और कार्रवाई की मांग की है।इसके अलावा महासंघ का दावा है कि कई बाइक टैक्सी चालकों का पुलिस सत्यापन नहीं हुआ है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे शहरों और राज्यों में पंजीकृत वाहनों के जरिए भी इंदौर में बाइक टैक्सी सेवा संचालित की जा रही है।
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हादसा हुआ तो यात्री की सुरक्षा कौन तय करेगा?
ऑटो महासंघ ने बाइक टैक्सी से जुड़े यात्रियों की सुरक्षा और बीमा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि बाइक टैक्सी से दुर्घटना होने की स्थिति में यात्री को मिलने वाली बीमा सुरक्षा और अन्य जिम्मेदारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।महासंघ का कहना है कि परिवहन विभाग को यह भी जांचना चाहिए कि व्यावसायिक यात्री परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों के पास आवश्यक दस्तावेज और वैध अनुमति है या नहीं।
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कलेक्टर के पुराने निर्देश का भी हवाला
महासंघ के पदाधिकारियों ने दावा किया कि पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर की ओर से भी बाइक टैक्सी का संचालन बंद करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की ओर से अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई।संगठन का आरोप है कि 2024 में यह मामला हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ तक भी पहुंचा था। इसके बाद परिवहन विभाग ने कुछ दोपहिया वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की, लेकिन महासंघ के मुताबिक यह अभियान लगातार जारी नहीं रह सका।
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गांधी हॉल की बैठक में आंदोलन का फैसला
बाइक टैक्सी के मुद्दे पर ऑटो महासंघ ने गांधी हॉल में बैठक की। बैठक में पदाधिकारियों और वाहन चालकों ने आगे की रणनीति पर चर्चा के बाद 1 अक्टूबर को प्रदर्शन का निर्णय लिया।महासंघ के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसमें रैपिडो कार्यालय और बाइक टैक्सी संचालकों के खिलाफ नियमानुसार चालानी कार्रवाई करने की मांग की जाएगी।
कार टैक्सी संगठन भी आंदोलन में होगा शामिल
महासंघ ने कहा है कि आंदोलन में बड़ी संख्या में ऑटो रिक्शा चालक और कार टैक्सी कल्याण समिति के पदाधिकारी शामिल होंगे। संगठन ने साफ किया है कि यदि ज्ञापन के बाद भी कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा और परिवहन विभाग के खिलाफ भी मोर्चा खोला जाएगा।




















