रातापानी के दाहोद में धान के खेत में मिली 4 साल की बाघिन की लाश, करंट से मौत की आशंका

भोपाल। मंडीदीप से लगे रातापानी टाइगर रिजर्व के दाहोद गांव में सोमवार को करीब 4 साल की बाघिन का शव धान के खेत में मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। बाघिन का शव दाहोद डैम से करीब दो किलोमीटर दूर खेत में मिला। घटनास्थल के पास बिजली के तार भी पाए गए हैं, जिसके चलते उसकी मौत करंट लगने से होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी बाघिन की मौत की वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शव की स्थिति काफी खराब थी और वह पूरी तरह डिकम्पोज्ड हो चुका था। वन विभाग की टीमें शिकार, करंट या किसी अन्य कारण से मौत की आशंका को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही हैं। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
खेत मालिक ने दी वन विभाग को सूचना
सूत्रों के मुताबिक सोमवार दोपहर करीब 2 बजे खेत मालिक ने धान के खेत में बाघिन का शव देखा। इसके बाद उसने तत्काल वन विभाग को सूचना दी। जानकारी मिलते ही औबेदुल्लागंज वन मंडल के DFO, वन्यजीव चिकित्सक और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। वन विभाग की टीम ने घटनास्थल के आसपास जांच शुरू की। बाघिन के शव के पास मिले बिजली के तारों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। इसके अलावा मौके से दूसरे संभावित साक्ष्यों को भी जुटाया गया।
डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम ने की जां
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने घटनास्थल के आसपास डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम से भी जांच कराई। टीमों ने बिजली के तारों के साथ आसपास के क्षेत्र को भी खंगाला। वन अमला यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि खेत में मौजूद बिजली के तार बाघिन की मौत से जुड़े हैं या नहीं। साथ ही किसी तरह के शिकार या अन्य आपराधिक गतिविधि की संभावना से भी जांच की जा रही है। बाघिन का शव पहले ही काफी खराब हो चुका था, इसलिए मौके से मिले साक्ष्य और पोस्टमार्टम जांच में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
मंगलवार सुबह होगा पोस्टमार्टम
देर रात होने के कारण सोमवार को बाघिन का पोस्टमार्टम नहीं कराया जा सका। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार सुबह पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद मौत के कारणों को लेकर स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकेगी। वन विभाग यह भी जांच कर रहा है कि बाघिन की मौत कब हुई और शव खेत तक किस तरह पहुंचा। शव के पूरी तरह डिकम्पोज्ड होने के कारण मौत का सही समय भी पोस्टमार्टम और अन्य जांच से सामने आने की उम्मीद है।
20 साल में पहली बार करंट से बाघ की मौत का मामला
स्थानीय स्तर पर इस घटना को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जानकारी के अनुसार रातापानी में करीब 20 साल में पहली बार किसी बाघ के करंट से मारे जाने की आशंका वाला मामला सामने आया है। हालांकि बाघिन की मौत करंट से ही हुई है इसकी पुष्टि अभी जांच और पोस्टमार्टम के बाद होगी। वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर खेतों के आसपास बिजली के तारों और अन्य जोखिम वाले स्रोतों की निगरानी भी इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पेट्रोलिंग व्यवस्था पर भी उठे सवाल
बाघिन का शव पूरी तरह डिकम्पोज्ड मिलने के बाद वन्यजीव मामलों से जुड़े लोगों ने रातापानी में पेट्रोलिंग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे का कहना है कि मानसून सीजन में टाइगर रिजर्व में पर्यटन पूरी तरह बंद रहता है और इस दौरान पेट्रोलिंग अधिक होने की बात कही जाती है। उनका कहना है कि यदि शव काफी पहले से पड़ा था और उसके डिकम्पोज्ड होने की स्थिति आ गई, तो वन अमले को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली। उन्होंने इसे पेट्रोलिंग की प्रभावशीलता से जोड़ते हुए सवाल उठाया है। यह टिप्पणी वन्यजीव कार्यकर्ता की राय है। पेट्रोलिंग में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है या नहीं, यह वन विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
PCCF वन्यजीव ने कहा- जांच के बाद सामने आएगा मौत का कारण
PCCF (वन्यजीव) डॉ. समीता रजौरा ने बताया कि दाहोद के एक खेत में बाघिन का शव मिला है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल के आसपास डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम से सर्चिंग कराई जा रही है। उनके मुताबिक मंगलवार सुबह बाघिन का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारणों का पता चल सकेगा।
ये भी पढ़ें: शाहगंज में बाघ का आतंक: हाईवे पर टहलता दिखा टाइगर, वीडियो वायरल; गांवों में मुनादी, जंगल जाने पर रोक
कान्हा टाइगर रिजर्व में भी बाघ शावक का शव मिला
इधर कान्हा टाइगर रिजर्व में भी करीब 9 माह के बाघ शावक का शव मिलने की सूचना है। वन विभाग ने इस मामले की भी जांच शुरू कर दी है। रातापानी में बाघिन और कान्हा में बाघ शावक की मौत से जुड़े दोनों मामले अलग-अलग हैं। वन विभाग संबंधित घटनास्थलों पर जांच कर मौत के कारणों का पता लगाने में जुटा है। रातापानी के दाहोद में मिली बाघिन के मामले में फिलहाल करंट से मौत की आशंका सबसे प्रमुख तौर पर सामने आई है, लेकिन इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के बाद ही होगी। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि बाघिन की मौत के बाद उसका शव इतने समय तक वन अमले की निगरानी में क्यों नहीं आया।




















