माधव टाइगर रिजर्व में डंप पाइप टाइगर और अन्य वन्य प्राणियों के लिए खतरा, NGT ने कहा-30 दिन में हटाएं

भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने शिवपुरी स्थत माधव टाइगर रिजर्व और आसपास के इलाकों में लापरवाही से फेंके गए 'ग्लास रीइन्फोर्सड प्लास्टिक' (जीआरपी) पाइपों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने संबंधित यूजर एजेंसी को निर्देश दिया है कि टाइगर रिजर्व और वन क्षेत्र में पड़े इस कचरे को 30 दिनों के भीतर तुरंत हटाया जाए।
पाइपलाइन बदली, पाइप खेतों में फेंके
यह आदेश न्यायिक सदस्य जस्टिस शियो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की बेंच ने याचिका आदित्य श्रीवास्तव बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य पर सुनवाई करते हुए जारी किया।
पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर खतरा
याचिका में कहा गया कि जीआरपी एक नॉन-बायोडिग्रेडेबल सामग्री (नहीं सड़ने वाला प्लास्टिक) है, जो वातावरण में लंबे समय तक बनी रहती है। यह धीरे-धीरे माइक्रोप्लास्टिक और फाइबरग्लास के कणों में बदलकर मिट्टी, जल और वायु को दूषित करती है। संरक्षित टाइगर रिजर्व क्षेत्र में इस कचरे की मौजूदगी से जैव विविधता, पारिस्थितिक संतुलन और वन्यजीवों के साथ-साथ स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। यह प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम (2016) और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम (1972) का सीधा उल्लंघन है।
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NGT ने दिया यह आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए NGT ने आदेश दिया कि वन और सड़क किनारे पड़े इन पाइपों को तुरंत हटाया जाए, ताकि वनों और वन्यजीवों को कोई नुकसान न पहुंचे। पीठ ने माधव टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को इस आदेश का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया गया।
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