UNESCO की टेंटेटिव सूची में मप्र के चार और ऐतिहासिक स्थल, बटेश्वर, गिन्नौरगढ़, उदयगिरि और बाघ की गुफाओं को मिलेगी नई पहचान

भोपाल। मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान की दिशा में बड़ी उपलब्धि मिली है। यूनेस्को (UNESCO) की टेंटेटिव (अस्थायी) सूची में प्रदेश के चार और ऐतिहासिक स्थलों को शामिल किया गया है। इनमें धार की बाघ गुफा चित्रकारी, सीहोर का गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना का बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह और विदिशा की उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं। इनके जुड़ने के बाद यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में मध्यप्रदेश के स्थलों की संख्या 19 हो गई है। इस उपलिब्ध पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर नई पहचान मिल रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई। उन्होंने कहा, हम सभी मिलकर अपनी विरासत के संरक्षण, संवर्धन और उसे विश्वभर तक पहुंचाने के संकल्प को और मजबूत करें।
ये है विरासतें
बाघ से गुप्तकाल तक की विरासत

धार की बाघ गुफाएं चौथी से छठी शताब्दी के बीच विकसित नौ बौद्ध शैल गुफाओं का समूह हैं। इनमें विशेष रूप से गुफा संख्या-4 के भित्ति चित्र महत्वपूर्ण हैं, जिनमें दरबार, जुलूस, संगीत और तत्कालीन सामाजिक जीवन के दृश्य दिखाई देते हैं।
सीहोर जिले के रातापानी क्षेत्र में स्थित गिन्नौरगढ़ किला

गोंड स्थापत्य और जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण उदाहरण है। प्राकृतिक पहाड़ी सुरक्षा के साथ किलेबंदी, जलाशय और बावड़ियां इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं।
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मुरैना के मंदिर समूह
मुरैना के बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह में आठवीं से 11वीं शताब्दी की मंदिर वास्तुकला और मूर्तिकला का विकास दिखाई देता है। बटेश्वर के मंदिर समूह, पदावली की नक्काशी और ककरामठ की स्थापत्य विशेषताएं इसे महत्वपूर्ण बनाती हैं।
विदिशा की उदयगिरि गुफाएं

गुप्तकालीन धार्मिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र रही हैं। यहां 20 शैल-कृत गुफाओं के साथ प्रसिद्ध वराह प्रतिमा और शिलालेख इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं।
टेंटेटिव सूची में पहले से 15 स्थल
प्रदेश के 15 स्थल पहले ही टेंटेटिव सूची में शामिल हैं। इनमें ग्वालियर किला, भोजेश्वर महादेव मंदिर, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, खूनी भंडारा, रामनगर के गोंड स्मारक, धामनार समूह, भेड़ाघाट-लामेताघाट, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, ओरछा का ऐतिहासिक समूह और मांडू के स्मारक शामिल हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रस्तावों के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की राष्ट्रीय प्रक्रिया के तहत इन चार स्थलों को सूची में शामिल किया गया है। टेंटेटिव सूची विश्व धरोहर सूची में अंतिम रूप से शामिल किए जाने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है।
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मप्र के पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद
इस संबंध में एमपी टूरिज्म बोर्ड के एमडी डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि, प्रदेश के चार और ऐतिहासिक स्थलों का टेंटेटिव सूची में शामिल होना प्रदेश की सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश के पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।




















