PU Special :लाइसेंस नवीनीकरण के बिना MP में ओला-उबर-रैपिडो का संचालन, RTO नोटिस के बाद भी जारी सेवाएं

मध्यप्रदेश में ओला, उबर और रैपिडो के एग्रीगेटर लाइसेंस 7-8 महीने से रिन्यू नहीं हुए हैं। भोपाल RTO ने तीनों कंपनियों को नोटिस जारी किया है फिर भी ऐप आधारित सेवाएं जारी हैं।
लाइसेंस नवीनीकरण के बिना MP में ओला-उबर-रैपिडो का संचालन, RTO नोटिस के बाद भी जारी सेवाएं
लाइसेंस नवीनीकरण के बिना MP में ओला-उबर-रैपिडो का संचालन

विजय एस गौर, भोपाल। मध्यप्रदेश में ओला, उबर और रैपिडो के जरिए टैक्सी, ऑटो और बाइक बुकिंग की सेवाएं लगातार चल रही हैं, लेकिन तीनों एग्रीगेटर कंपनियों के राज्य में संचालन से जुड़े लाइसेंस का नवीनीकरण अब तक नहीं हुआ है। परिवहन विभाग के अनुसार इन लाइसेंस की अवधि करीब 7 से 8 महीने पहले समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद कंपनियों की सेवाएं जारी हैं। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय भोपाल ने करीब दो महीने पहले तीनों कंपनियों को नोटिस जारी कर लाइसेंस का नवीनीकरण कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी लाइसेंस प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट नहीं है। एग्रीगेटर कंपनियों के संचालन, भोपाल में स्थानीय कार्यालय और लाइसेंस से जुड़े मुद्दे को लेकर 19 अगस्त 2026 को परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह के साथ टैक्सी चालक संघ और परिवहन अधिकारियों की बैठक में भी चर्चा हुई थी।

लाइसेंस की अवधि खत्म, फिर भी ऐप से मिल रही सवारी

मध्यप्रदेश में ओला, उबर और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए रोजाना बड़ी संख्या में टैक्सी, ऑटो और बाइक सेवाएं संचालित होती हैं। इन कंपनियों का काम यात्रियों को ड्राइवरों से डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जोड़ना है। ऐसे में सवाल एग्रीगेटर कंपनियों के लाइसेंस की स्थिति को लेकर उठ रहा है। RTO के मुताबिक तीनों कंपनियों के लाइसेंस की निर्धारित अवधि निकल चुकी है और उन्हें नवीनीकरण के लिए नोटिस भी दिए जा चुके हैं। यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि एग्रीगेटर कंपनी का लाइसेंस और किसी चालक के वाहन का परमिट या अन्य वैधानिक दस्तावेज अलग-अलग होते हैं। मौजूदा मामला मुख्य रूप से एग्रीगेटर के संचालन लाइसेंस से जुड़ा है।

RTO ने दो महीने पहले जारी किया था नोटिस

क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी जितेंद्र शर्मा के मुताबिक ओला, उबर और रैपिडो के लाइसेंस रिन्यूअल की तारीख निकल चुकी है। उन्होंने बताया कि करीब दो महीने पहले तीनों कंपनियों को नोटिस जारी कर लाइसेंस नवीनीकरण कराने के लिए कहा गया है। RTO के अनुसार कंपनियों को यह भी कहा गया है कि भोपाल में स्थानीय कार्यालय की व्यवस्था की जाए। विभाग से बातचीत में कंपनियों की ओर से जल्द भोपाल में ऑफिस शुरू करने की बात कही गई है। RTO के मुताबिक रैपिडो का कार्यालय भोपाल में मौजूद है जबकि ओला और उबर को स्थानीय कार्यालय को लेकर नोटिस दिया गया है। हालांकि लाइसेंस अवधि खत्म होने के बावजूद संचालन जारी रहने की स्थिति में अब तक किस स्तर की कार्रवाई की गई है, इस पर RTO की ओर से तत्काल स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया।

MP के 2017 नियमों में लाइसेंस जरूरी

मध्यप्रदेश में एग्रीगेटर कंपनियों के लिए Madhya Pradesh Aggregator for the Hire of Maxi Cab, Motor Cab, Auto Rickshaw and Motor Cycle Rules, 2017 के तहत लाइसेंस का प्रावधान है। नियम-3 के अनुसार कोई व्यक्ति इन श्रेणियों की सेवाओं के लिए एग्रीगेटर के रूप में बिना वैध लाइसेंस के काम नहीं कर सकता। नियम-8 के तहत लाइसेंस की वैधता दो वर्ष है। वहीं नियम-9 में नवीनीकरण का प्रावधान है और देरी होने पर शर्तों के तहत 5,000 रुपये प्रति माह या उसके हिस्से की लेट फीस का प्रावधान किया गया है। नियमों में जिस शहर के लिए लाइसेंस लिया जाता है, वहां रजिस्टर्ड ऑफिस की शर्त भी रखी गई है। नियमों के मुताबिक लाइसेंसधारी को अपने ऐप या वेब पोर्टल पर लाइसेंस, कंपनी, कार्यालय और संपर्क संबंधी जानकारी अपडेट रखना भी जरूरी है।

भोपाल में बड़ी संख्या में होती हैं राइड

एग्रीगेटर कंपनियों के कारोबार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश में रैपिडो की करीब 2 लाख राइड रोजाना होने और उबर की करीब 13 लाख मासिक राइड का आंकड़ा बताया था। इतने बड़े पैमाने पर सेवाएं संचालित होने के कारण एग्रीगेटर के लाइसेंस, स्थानीय कार्यालय और नियामकीय अनुपालन की स्थिति महत्वपूर्ण हो जाती है। खासतौर पर तब, जब राज्य परिवहन विभाग पहले ही लाइसेंस नवीनीकरण को लेकर कंपनियों को नोटिस जारी कर चुका हो।

स्थानीय ऑफिस नहीं होने पर जवाबदेही का सवाल

एग्रीगेटर कंपनियों के स्थानीय संचालन को लेकर कर अनुपालन और लेन-देन की निगरानी का मुद्दा भी सामने आ रहा है। भोपाल के CA अमित जैन के मुताबिक कंपनियों की स्थानीय उपस्थिति नहीं होने पर राज्य स्तर पर लेन-देन और टैक्स अनुपालन से जुड़ी प्रक्रिया ज्यादा जटिल हो सकती है। उनका कहना है कि स्थानीय ऑफिस की मौजूदगी से नियामकीय संवाद और संबंधित मामलों में दस्तावेजी प्रक्रिया को संभालना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

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ड्राइवरों की शिकायत और कंपनी की जवाबदेही भी अहम

ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े ड्राइवरों के सामने कमीशन, वाहन संचालन, शिकायत, भुगतान और अनुबंध जैसे मुद्दे भी आते रहते हैं। ऐसे मामलों में कंपनी की जवाबदेही और शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता आकांक्षा सिंह के मुताबिक, यदि एग्रीगेटर की स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उपस्थिति नहीं है तो शिकायत के समाधान और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि ड्राइवरों की कानूनी स्थिति और उन पर लागू श्रम कानून हर मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।

19 अगस्त की बैठक में भी उठा था मुद्दा

एग्रीगेटर कंपनियों की स्थिति को लेकर 19 अगस्त 2026 को परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह के साथ टैक्सी चालक संघ और परिवहन अधिकारियों की बैठक में भी चर्चा हुई थी। बैठक में कंपनियों के लाइसेंस के साथ उनके स्थानीय कार्यालय और संचालन से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। इसके बाद भी लाइसेंस नवीनीकरण की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। दूसरी ओर, कंपनियों की ऐप आधारित सेवाएं लगातार लोगों को उपलब्ध हो रही हैं।

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लाइसेंस खत्म होने के बाद कार्रवाई पर RTO का जवाब अधूरा

क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी जितेंद्र शर्मा ने बताया कि ओला, उबर और रैपिडो के एग्रीगेटर लाइसेंस की अवधि खत्म हुए करीब 7 से 8 महीने हो चुके हैं और लाइसेंस नवीनीकरण की तारीख निकल चुकी है। उन्होंने कहा कि तीनों कंपनियों को करीब दो महीने पहले नोटिस जारी कर लाइसेंस रिन्यू कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कंपनियां लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराती हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।  भोपाल में ओला और उबर के स्थानीय कार्यालय के सवाल पर RTO जितेंद्र शर्मा ने बताया कि दोनों कंपनियों को भोपाल में ऑफिस खोलने के संबंध में नोटिस दिया गया है। कंपनियों की ओर से जल्द ही भोपाल में कार्यालय शुरू करने की बात कही गई है। 

वहीं उन्होंने बताया कि रैपिडो का ऑफिस भोपाल में मौजूद है। लाइसेंस एक्सपायर होने के बावजूद एग्रीगेटर कंपनियों का संचालन जारी रहने पर विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की जाएगी, इस सवाल पर जितेंद्र शर्मा ने कहा कि वह उस समय इलाहाबाद जा रहे थे और फोन पर आवाज स्पष्ट नहीं आ रही थी। उन्होंने कहा कि सोमवार या मंगलवार को लौटने के बाद इस संबंध में पूरी जानकारी के साथ बात की जा सकेगी।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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