Raipur News:रामअवतार जग्गी हत्याकांड के शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 23 साल पुराने केस में जेल से रिहाई का रास्ता साफ

रायपुर: करीब 23 साल पुराने बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में दोषी ठहराए गए शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। जिला अदालत से मिली उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने यह राहत दी, जिससे उसके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत
रायपुर के चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में दोषी शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। सोमवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने उसकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए अंतरिम राहत प्रदान की। इसके बाद उसके जेल से रिहा होने की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर की थी अपील
चिमन सिंह ने रायपुर जिला अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसी अपील पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने उसे जमानत दे दी। हालांकि, मामले की अंतिम सुनवाई और फैसला अभी बाकी है।
2007 में कई आरोपी ठहराए गए थे दोषी
रामअवतार जग्गी हत्याकांड में वर्ष 2007 में रायपुर की जिला अदालत ने चिमन सिंह, याह्या ढेबर, एएस गिल सहित कई पुलिस अधिकारियों और कुल 28 आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं अमित जोगी को जिला अदालत ने बरी कर दिया था। बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें भी दोषी ठहराया, लेकिन उस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा रखी है।
दिनदहाड़े हुई थी सनसनीखेज हत्या
चार जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के तत्कालीन प्रदेश कोषाध्यक्ष रामअवतार जग्गी की रायपुर के मौदहापारा थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात ने पूरे प्रदेश की राजनीति और कानून व्यवस्था को झकझोर दिया था। उस समय यह प्रदेश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल था।
एक बार फिर चर्चा में आया मामला
सुप्रीम कोर्ट से चिमन सिंह को मिली जमानत के बाद यह बहुचर्चित हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील पर अंतिम फैसला कब आता है और आगे इस मामले में क्या कानूनी दिशा तय होती है।












