CG NEWS:26 करोड़ का ओवरब्रिज पहली बारिश में फेल, 12 दिन बाद भी रेलवे की जांच का नहीं मिला कोई सुराग

संजय सिंह, राजपूत राजनादगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 26 करोड़ रुपये की लागत से बने बरगा रेलवे ओवरब्रिज में पहली ही बारिश के बाद दरारें पड़ने और एप्रोच सड़क धंसने का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। हैरानी की बात यह है कि घटना के करीब 12 दिन बाद भी रेलवे यह स्पष्ट नहीं कर पा रहा कि जांच शुरू हुई है या नहीं और जांच किस अधिकारी को सौंपी गई है।
करोड़ों का प्रोजेक्ट पहली बारिश में बेनकाब
राजनांदगांव के बरगा रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण लगभग 26 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। लोकार्पण के कुछ समय बाद ही पहली बारिश में पुल के एप्रोच हिस्से में दरारें पड़ गईं और सड़क धंस गई। वहीं अलीवारा में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच सड़क भी बारिश में बह गई। इन घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन ने दिखाई गंभीरता
घटना सामने आने के बाद कलेक्टर जितेंद्र यादव ने मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को पत्र भेजकर तकनीकी जांच कराने की मांग की। इसके बाद सांसद संतोष पांडे ने केंद्रीय रेल मंत्री को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की अनुशंसा की।
रेलवे के पास ही नहीं जांच की जानकारी
मामले की पड़ताल के दौरान रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी फैज खान अशरफी से जब जांच की स्थिति पूछी गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि जांच किस अधिकारी को सौंपी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच शुरू हुई है या नहीं, इसकी जानकारी भी उनके पास उपलब्ध नहीं है।
पांच सवाल जनता का जिनका जवाब नहीं
- क्या जांच शुरू हुई?
- घटना के करीब 12 दिन बाद भी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
- जांच अधिकारी कौन?
- रेलवे अब तक किसी अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं कर पाया है।
- रिपोर्ट कब आएगी?
- जांच रिपोर्ट की कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है।
- जिम्मेदार कौन?
- निर्माण एजेंसी और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही अब तक तय नहीं हुई।
- जनता को जवाब कब?
करोड़ों रुपये की सार्वजनिक परियोजना पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन रेलवे की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है।
गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना की असली परीक्षा बारिश के दौरान होती है। पहली ही बारिश में पुल और एप्रोच सड़क को नुकसान पहुंचना निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और कार्य निष्पादन पर सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों में त्वरित जांच और पारदर्शिता जरूरी मानी जाती है।
चुप्पी बढ़ा रही संदेह
जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कार्रवाई की मांग किए जाने के बावजूद रेलवे की ओर से जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं किए जाने से लोगों के मन में संदेह बढ़ रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रेलवे कब जांच शुरू होने, जिम्मेदार अधिकारियों और आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी देता है।












