राहुल का पीएम पर निशाना...चोर को पकड़ने की बजाए पीड़ित के घर पर ताला लटका दो, क्या अगली बारी वाट्सऐप की?

नेशनल डेस्क। NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस फैसले को छात्रों के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि पेपर लीक रोकने के नाम पर असली दोषियों के बजाय छात्रों को परेशान किया जा रहा है।
राहुल ने फैसले को गलत बताया
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार के इस निर्णय की तीखी आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, टेलीग्राम पर प्रतिबंध मोदी सरकार का पेपर लीक रोकने का नया नुस्खा है। यानी चोर को पकड़ने के बजाय, पीड़ित के घर पर ताला लटका दो। राहुल गांधी का कहना है कि लाखों छात्र अपनी पढ़ाई, नोट्स साझा करने, टेस्ट सीरीज और परीक्षा संबंधी चर्चाओं के लिए टेलीग्राम का उपयोग करते हैं। ऐसे में इस प्लेटफॉर्म को बंद करना छात्रों के लिए असुविधा पैदा करेगा।
छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ने का दावा
कांग्रेस का तर्क है कि टेलीग्राम केवल एक मैसेजिंग ऐप नहीं बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक मंच बन चुका है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि कुछ लोग इसका दुरुपयोग कर रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, न कि पूरे प्लेटफॉर्म को बंद कर देना चाहिए।
सरकार के उपायों पर राहुल का कटाक्ष
राहुल गांधी ने सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते हुए लिखा, और यह फूलप्रूफ भी नहीं है, यह देश का हर छात्र जानता है, और पेपर लीक माफ़िया भी। फिर अगला प्रतिबंध किसपर लगाएंगे? व्हाट्सएप पर? उन्होंने आगे व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, परीक्षा के दिन छात्रों की तलाशी होगी। जेबें कैंची से काटी जाएंगी। प्रश्नपत्र वायुसेना के विमानों से भेजे जाएंगे। दिखावे की कोई कमी नहीं होगी। लेकिन बीमारी की जड़ पर एक वार भी नहीं, क्योंकि पेपर लीक माफ़िया इसी सरकार की देख-रेख में फल-फूल रहा है, और युवाओं को खून के आंसू रुला रहा है।
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पेपर लीक माफिया पर कार्रवाई की मांग
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने सरकार से सीधे तौर पर पेपर लीक नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, मोदी जी, दिखावा छोड़िए। माफिया पर वार कीजिए, छात्र पर नहीं। ‘छात्रों की गूंज’ सुन लीजिए, वरना देश का युवा अपना हक़ लेना जानता है।
शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुरक्षा पर बढ़ी बहस
टेलीग्राम पर प्रतिबंध के फैसले ने एक बार फिर देश में परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका और पेपर लीक की चुनौती को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां सरकार इसे परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे मूल समस्या से ध्यान भटकाने वाला कदम करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।
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टेलीग्राम पर फैलाई जा रही थी भ्रामक सूचनाएं
सरकार ने मंगलवार को भारत में टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप के उपयोग पर 22 जून तक के लिए अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अनुसार, कुछ लोग टेलीग्राम के जरिए फर्जी प्रश्नपत्र और भ्रामक सूचनाएं फैलाकर अभ्यर्थियों को गुमराह कर रहे थे। इसी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उल्लेखनीय है कि NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा अब 21 जून को आयोजित की जाएगी।
किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देंगे : NTA महानिदेशक अभिषेक सिंह
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को भारत में टेलीग्राम पर 22 जून तक प्रतिबंध लगा दिया है। इस कदम को उचित ठहराते हुए NTA ने कहा कि कुछ ठग टेलीग्राम का इस्तेमाल छात्रों से पैसे ऐंठने के लिए कर रहे थे और झूठा दावा कर रहे थे कि उनके पास "री-एग्जाम के लीक हुए प्रश्नपत्र" उपलब्ध हैं। NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने समाचार एजेंसी PTI से कहा, हम किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देंगे। परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और कदाचार-मुक्त तरीके से संपन्न कराने के लिए हम हर संभव कदम उठाएंगे। NTA ने छात्रों और अभिभावकों को उन फर्जी वीडियो, कथित सबूतों और छेड़छाड़ किए गए चैट संदेशों से भी सावधान रहने की चेतावनी दी है, जिन्हें चिंतित अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को जाल में फंसाने के लिए प्रसारित किया जा रहा है। इस बीच, टेलीग्राम ने इस अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है।












