साल में 13 बार रिचार्ज!राघव चड्ढा ने संसद में उठाया रिचार्ज का अनोखा मुद्दा

राघव चड्ढा ने संसद में टेलीकॉम कंपनियों की पोल खोली है। उन्होंने कहा कि साल में 13 बार रिचार्ज करना और वैलिडिटी खत्म होने पर इनकमिंग कॉल और OTP न मिलना यूजर्स के लिए चिंता का विषय है।
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राघव चड्ढा ने संसद में उठाया रिचार्ज का अनोखा मुद्दा
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 11 मार्च को संसद में प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज के मुद्दे पर जोरदार बहस छेड़ी। उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों पर आरोप लगाया कि वे यूज़र्स के साथ मनमानी कर रही हैं। सांसद ने कहा कि प्रीपेड रिचार्ज खत्म होने के बाद इनकमिंग कॉल और जरूरी मैसेज भी ब्लॉक कर दिए जाते हैं, जिससे यूजर्स परेशान हो जाते हैं।

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    रिचार्ज खत्म होने पर कॉल बंद क्यों?

    राघव चड्ढा ने कहा कि अगर रिचार्ज की वैलिडिटी खत्म हो जाए तो आउटगोइंग कॉल बंद होना समझ में आता है। लेकिन इनकमिंग कॉल्स भी रोक दी जाती हैं, यह उचित नहीं है। कई बार बैंक OTP, सरकारी नोटिफिकेशन और जरूरी कॉल्स नहीं पहुंच पाते। ऐसे में इमरजेंसी या महत्वपूर्ण स्थिति में व्यक्ति पूरी तरह मोबाइल नेटवर्क से कट सकता है। सांसद ने जोर देकर कहा कि यूजर्स को वैलिडिटी खत्म होने के बाद भी कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल्स और मैसेज मिलने चाहिए।

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    सरकार से सांसद की मांग

    राघव चड्ढा ने सरकार से तीन मुख्य मांगें रखीं-

    • आखिरी रिचार्ज के बाद कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल और SMS सक्रिय रहें।
      मोबाइल नंबर को आखिरी रिचार्ज के बाद कम से कम तीन साल तक डीएक्टिवेट न किया जाए।
    • टेलीकॉम कंपनियां कम कीमत वाला सिर्फ इनकमिंग प्लान लॉन्च करें, ताकि केवल जरूरी कॉल, OTP और सरकारी सेवाओं के लिए नंबर एक्टिव रखा जा सके। 

    उन्होंने कहा कि यह बदलाव प्रीपेड यूजर्स के लिए फेयरनेस और ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करेगा।

    क्यों 28 दिन में 13 रिचार्ज?

    सांसद ने 28 दिन के मंथली रिचार्ज पर भी सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि ज्यादातर कंपनियां 28 दिन के रिचार्ज साइकल का उपयोग करती हैं। इसका मतलब है कि एक साल में यूजर्स को 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है, जबकि सामान्य कैलेंडर महीनों में केवल 12 रिचार्ज पर्याप्त होता। राघव चड्ढा ने कहा कि रिचार्ज प्लान को कैलेंडर महीनों के हिसाब से सिंक किया जाना चाहिए, ताकि यूजर्स पर अतिरिक्त खर्च न पड़े।

    प्रीपेड मोबाइल यूजर्स की चिंता

    सांसद ने यह भी कहा कि भारत में 125 करोड़ मोबाइल यूजर्स में लगभग 90% प्रीपेड हैं। मोबाइल फोन आज किसी लक्जरी की चीज नहीं है, बल्कि एक लाइफलाइन बन चुका है। प्रीपेड यूजर्स को सरल, पारदर्शी और फेयर रिचार्ज प्लान मिलने चाहिए।

    छोटे-छोटे 28 दिन वाले रिचार्ज या अन्य चालाकी भरी चीजें यूजर्स के लिए परेशानी बन जाती हैं। उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों से अपील की कि वे अपने प्लान को यूज़र्स के हित में बदलें और जरूरी कम्युनिकेशन कभी भी बाधित न हो।

    टेलीकॉम पॉलिसी पर बहस

    सांसद राघव चड्ढा की इस बात ने संसद में टेलीकॉम पॉलिसी पर बहस को जन्म दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रीपेड रिचार्ज यूजर्स के लिए सिर्फ कॉल और डेटा तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षा और संपर्क का साधन भी है।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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