Pok :रावलकोट में प्रोटेस्ट पर हिंसक प्रदर्शन, पाकिस्तानी सेना के जुल्म से 9 लोगों की गई जान; इंटरनेट सेवाएं भी ठप

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर(Pok) के रावलकोट में जारी विरोध प्रदर्शन सोमवार को हिंसक मोड़ पर पहुंच गया। प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने दावा किया है कि रावलकोट में हुई कार्रवाई में कम से कम नौ लोगों की जान गई है। हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हिंसा के बाद कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान प्रभावित हुआ है।
JAAC ने नौ लोगों की मौत का किया दावा
आंदोलन का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने कहा कि रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान नौ लोगों की मौत हुई। संगठन की ओर से जारी हाथ से लिखी सूची में उस्मान नजीर, काशिफ, मोहम्मद इब्राहिम, अर्सल असगर, हनीफ मोहम्मद बशीर, वसीम अफजल, बासित शाह और साबिर खान समेत मृतकों के नाम शामिल बताए गए हैं। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में मृतकों की संख्या इससे ज्यादा होने का भी दावा किया गया है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं स्थानीय लोग?
PoK में जून की शुरुआत से ही बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी स्थानीय विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों की व्यवस्था समाप्त करने, स्थानीय लोगों को ज्यादा राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने, गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई, बेहतर प्रशासन, बिजली सहित अन्य आर्थिक समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। इन मुद्दों को लेकर कई शहरों में धरने, बाजार बंद और सार्वजनिक परिवहन प्रभावित रहा है।
इंटरनेट सेवाएं प्रभावित, बढ़ी सुरक्षा
हिंसा के बाद रावलकोट और आसपास के कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बाधित किए जाने की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। इससे पहले भी आंदोलन के दौरान संचार सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने और आवाजाही सीमित करने के आरोप लगते रहे हैं।
पहले भी हो चुकी हैं कई हिंसक झड़पें
रावलकोट और अन्य इलाकों में पिछले कई सप्ताह से प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, जून से शुरू हुए आंदोलन के दौरान कई लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के सदस्य दोनों शामिल हैं। पाकिस्तान प्रशासन का कहना रहा है कि सुरक्षा बलों ने कई मामलों में आत्मरक्षा में कार्रवाई की, जबकि प्रदर्शनकारी इसे दमनात्मक कार्रवाई बता रहे हैं।
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चुनावी माहौल पर भी पड़ा असर
PoK में जारी आंदोलन का असर राजनीतिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। सुरक्षा कारणों से कुछ क्षेत्रों में चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हुई है और आंदोलनकारी संगठन JAAC ने चुनावों के बहिष्कार का भी ऐलान किया है। प्रदर्शनकारी पाकिस्तान सरकार पर वादे पूरे न करने और स्थानीय जनता की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं।












