PM मोदी को स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान :विदेशी धरती पर मिला 31वां अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड, भारतीय समुदाय से कर सकेत हैं मुलाकात

एम्सटर्डम। पीएम मोदी को स्वीडन में रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलरल स्टार कमांडर ग्रैस क्रॉस सम्मान से नवाजा गया है। यह स्वीडन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। मोदी रविवार को गोथेनबर्ग शहर में हुए कार्यक्रम में शामिल हुए थे इसे दौरान उन्हें यह सम्मान दिया गया। इस मौक पर स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन सहित कई सीनियर नेता मौजूद रहे थे। बता दें यह मोदी को मिलने वाला 31वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मान है।
8 साल बाद स्वीडन में मोदी
पीएम मोदी 8 साल के बाद स्वीडन पहुंचे हैं। इससे पहले उन्होंने साल 2018 में स्वीडन दौरे पर आए थे। वहीं जैसे ही मोदी का विमानन स्वीडन में एंटर किया उन्हें स्वीडिश फाइटर जेट्स ने सुरक्षा देते हुए एस्कॉर्ट किया। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन पीएम को रिसीव करने के लिए गोथेनबर्ग एयरपोर्ट पर भी पहुंचे।
पीएम भारतीय समुदाय से मिल सकते हैं
PM मोदी के स्वीडन के होटल पहुंचने पर बंगाली तरीके से आरती उतारी गई और क्लासिकल डांस से उनका स्वागत किया गया। इस दौरे के दौरान पीएम मोदी भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात कर सकते हैं।
यह दौरा भारत और स्वीडन के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस दौरान व्यापार, तकनीक, रक्षा और ग्रीन एनर्जी जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों की भी उम्मीदें है।
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नीदरलैंड से भारत आएंगी 1000 साल पुरानी चोल ताम्र पट्टिकाएं
पीएम नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत को बड़ी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सफलता मिली है। 11वीं सदी की ऐतिहासिक चोल ताम्र पट्टिकाओं को भारत वापस लाने पर दोनों देशों के बीच समझौता हुआ है। ये करीब 1000 साल पुराने तमिल दस्तावेज हैं, जिनमें चोल साम्राज्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज हैं।
ये ताम्र पट्टिकाएं 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की प्लेटों का संग्रह हैं। इनमें ज्यादातर लेख तमिल भाषा में लिखे गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इन दस्तावेजों में राजा राजेंद्र चोल प्रथम और उनके पिता राजा राजराजा चोल प्रथम के शासन, प्रशासन और दान संबंधी जानकारियां दर्ज हैं।
क्या होती हैं ताम्र पट्टिकाएं?
पुराने समय में महत्वपूर्ण घोषणाएं, जमीन दान, प्रशासनिक फैसले और राजकीय आदेश तांबे की प्लेटों पर लिखे जाते थे। इन्हें ताम्र पट्टिकाएं कहा जाता है। इतिहासकारों के लिए ये दस्तावेज बेहद अहम माने जाते हैं क्योंकि इनसे उस दौर की राजनीति, समाज और संस्कृति की जानकारी मिलती है।
विदेश कैसे पहुंचीं ये पट्टिकाएं?
विशेषज्ञों के मुताबिक 19वीं सदी में यूरोपीय देशों ने भारत और एशिया में व्यापार और रिसर्च के दौरान कई ऐतिहासिक वस्तुएं अपने देशों में पहुंचा दी थीं। माना जाता है कि उसी दौरान ये चोल ताम्र पट्टिकाएं भी नीदरलैंड पहुंच गई थीं।
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भारत के लिए क्यों अहम है यह वापसी?
इन दस्तावेजों की वापसी को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है।
- चोल साम्राज्य के इतिहास पर रिसर्च को नई जानकारी मिलेगी
- तमिल संस्कृति और विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी
- भारत अपनी खोई हुई ऐतिहासिक धरोहर वापस पा सकेगा
- संग्रहालयों और इतिहासकारों को दुर्लभ दस्तावेज उपलब्ध होंगे
- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ASML के बीच बड़ा समझौता
नीदरलैंड के द हेग में आयोजित कार्यक्रम में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ASML के बीच भी अहम समझौता हुआ। यह करार सेमीकंडक्टर और चिप तकनीक में सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया है।
ASML दुनिया की प्रमुख चिप मशीन बनाने वाली कंपनियों में शामिल है, जबकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण पर तेजी से निवेश कर रही है। माना जा रहा है कि इससे भारत को चिप मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा फायदा मिलेगा।
नीदरलैंड के राजा-रानी से मिले मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने द हेग में नीदरलैंड के राजा विलेम एलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात की। यह बैठक शाही महल ‘पैलेस हाउस टेन बॉश’ में हुई। बैठक में दोनों देशों ने शिक्षा, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, वाटर मैनेजमेंट और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
भारत में निवेश का सबसे बेहतर समय- मोदी
CEO राउंड टेबल बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में निवेश और कारोबार के लिए यह सबसे अच्छा समय है। उन्होंने बताया कि टैक्स, लेबर कानून और सरकारी प्रक्रियाओं में सुधार के कारण भारत में मैन्युफैक्चरिंग पहले से ज्यादा आसान और सस्ती हुई है। मोदी ने यह भी बताया कि भारत में 300 से ज्यादा डच कंपनियां काम कर रही हैं और भारत-यूरोपीय संघ FTA समझौता दोनों पक्षों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।











