वीडी सतीशन केरलम CM बने :21 मंत्री भी ले रहे शपथ, कैबिनेट में 14 नए चेहरे, खरगे बोले- जनता ने 10 साल के लेफ्ट शासन को नकारा

तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने केरलम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ समारोह तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में हुआ। सीएम के बाद उनकी कैबिनेट के 20 और मंत्री भी पद की शपथ ले रहे हैं। सतीशन के मुताबिक, 60 साल बाद केरलम में पूरी कैबिनेट एक साथ शपथ लेगी।
सतीशन से पहले केरल के तीसरे मुख्यमंत्री रहे आर शंकर ने 1962 में पूरी कैबिनेट के साथ शपथ ली थी। लेकिन 1964 में अविश्वास प्रस्ताव के बाद उनकी सरकार गिर गई।
नई कैबिनेट में 14 नए चेहरे
पहली बार मंत्री बने ये प्रमुख नेता
- सीपी जॉन
- एन. शमसुद्दीन
- केएम शाजी
- पीके बशीर
- वीई अब्दुल गफूर
- पीसी विष्णुनाथ
- रोजी एम जॉन
- बिंदु कृष्णा
- टी सिद्दीकी
- केए थुलसी
- ओजे जनीश
केरलम में सतीशन युग की शुरुआत
राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस की नई पीढ़ी की कैबिनेट मान रहे हैं। पार्टी ने अनुभव और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।स्पीकर और डिप्टी स्पीकर पद भी कांग्रेस के पास, कांग्रेस ने विधानसभा के दोनों अहम पद भी अपने पास रखे हैं। वीडी सतीशन के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही केरल में एक बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत हो गई। इसके साथ ही पिनरई विजयन के नेतृत्व वाली CPI(M) सरकार के 10 साल लंबे शासन का औपचारिक अंत हो गया।
करीब एक दशक बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) फिर से सत्ता में लौटा है। इससे पहले राज्य में कांग्रेस की सरकार दिवंगत नेता ओमान चांडी के नेतृत्व में थी।
खरगे- जनता ने 10 साल की सरकार को नकारा
शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे केरल की ऐतिहासिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि 10 साल बाद UDF की सत्ता में वापसी कांग्रेस और केरल की जनता दोनों के लिए खास पल है।
खरगे ने कहा कि लोगों ने LDF सरकार के 10 साल के शासन को नकारा है। अब नई सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता को बेहतर प्रशासन और विकास दे।
चुनाव में UDF की बड़ी जीत
- केरल विधानसभा की कुल सीटें: 140
UDF ने जीतीं: 102 सीटें - कांग्रेस अकेले जीती: 63 सीटें
यह केरल में कांग्रेस का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन माना जा रहा है
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक कांग्रेस को इस बार एंटी-इंकम्बेंसी, संगठन की मजबूती और युवा नेतृत्व का फायदा मिला। वहीं LDF सरकार को लगातार 10 साल सत्ता में रहने के कारण जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ा।
यह भी पढ़ें: रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला : दिल्ली में महिलाओं के स्टार्टअप्स को बिना गारंटी मिलेगा 10 करोड़ तक का लोन
किसे मिली जिम्मेदारी?
- तिरुवनचूर राधाकृष्णन बने विधानसभा स्पीकर
- शनिमोल उस्मान को डिप्टी स्पीकर बनाया गया
आगे का शेड्यूल
22 मई: विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव
29 मई: राज्यपाल का नीतिगत संबोधन
5 जून तक: राज्य बजट पेश होने की संभावना
UDF सरकार की यह शुरुआत इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उसने राज्य में LDF के 10 साल पुराने शासन को खत्म कर सत्ता में वापसी की है। अब नई सरकार पर चुनावी वादों को तेजी से लागू करने और प्रशासनिक बदलाव दिखाने का दबाव रहेगा।











