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PU Special :AI की मदद से 2-3 बाघ, तेंदुए,भालू और जंगली कुत्तों के बीच खोज निकाला गया खूंखार बाघ 'PN 103 M'

मध्य प्रदेश में पहली बार पेंच टाइगर रिजर्व ने एआई आधारित पेंच एडवांस वार्निंग सिस्टम (PAVS) की मदद से एक बाघ का सफल रेस्क्यू किया। आधुनिक कैमरों, डीएनए सैंपलिंग और डेटा विश्लेषण के जरिए लक्ष्य बाघ की सटीक पहचान की गई। रेस्क्यू के बाद घिसे हुए कैनाइन दांतों के कारण बाघ को वन विहार, भोपाल भेजा गया।
AI की मदद से 2-3 बाघ, तेंदुए,भालू और जंगली कुत्तों के बीच खोज निकाला गया खूंखार बाघ 'PN 103 M'
जबलपुर। पीएवीएस सिस्टम की मदद से बाघ को रेस्क्यू किया गया।

हर्षित चौरसिया, जबलपुर। आधुनिकता के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का फायदा अब वन विभाग अपने रेस्क्यू ऑपरेशनों में करने लगा है। प्रदेश में पहली बार एआई पेंच एडवांस वार्निंग सिस्टम (PAVS) से लैस कैमरों का इस्तेमाल कर पेंच टाइगर रिजर्व के बरघाट-लामटा में एक बाघ को रेस्क्यू कर पकड़ने में वन विभाग ने सफलता हासिल की है।

लोकेशन पता करना थी बड़ी चुनौती

बताया जाता है कि पिछले करीब 4 माह से पेंच टाइगर रिजर्व के आसपास और इससे लगे हुए इलाके में वन्यजीव-मानव के बीच द्वंद्व की घटनाएं सामने आई थीं। इसे देखते हुए बाघ को रेस्क्यू करने का निर्णय लिया गया। टारगेट बाघ की लोकेशन ट्रेस करना विभाग के लिए तब चुनौती के रूप में सामने आया, जब बाघ दुर्गम क्षेत्र में पहुंच गया, जहां पर इसके साथ 7 बाघों के साथ भालू, तेंदुए, जंगली कुत्तों का झुंड भी शामिल रहा। इसे देखते हुए बाघ की लोकेशन एआई बेस्ड PAVS तकनीक से ट्रेस करने की योजना बनाई गई और तकनीक के जरिए टारगेट बाघ की सही लोकेशन लेकर उसे टैंक्विलाइज करने के बाद रेस्क्यू कर लिया गया।

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जहां मूवमेंट था वहां 7 वन्यजीव थे

पेंच के डिप्टी डायरेक्टर एवं तकनीक को तैयार करने वाले वन अधिकारी पुनीत गोयल ने बताया कि इस अभियान की सबसे बड़ी बाधा यह थी कि जिस क्षेत्र में बाघ का मूवमेंट था, वहां एक साथ 7 अन्य वन्यजीव, जिसमें बाघों के साथ-साथ तेंदुए, भालू और जंगली कुत्तों का भी भारी जमावड़ा था। इसके अलावा, दुर्गम भू-भाग और कई गांवों से सटी सीमाओं के कारण यह तय करना असंभव सा था कि इंसानों पर खतरा पैदा करने वाला असली 'लक्ष्य बाघ' कौन सा है।

पेंच एडवांस वार्निंग सिस्टम की मदद से रेस्क्यू

इसे सुलझाने के लिए वन विभाग ने 'पेंच एडवांस वार्निंग सिस्टम' का सहारा लिया। सामरिक स्थानों पर लगाए गए आधुनिक एआई कैमरों और डीएनए सैंपलिंग के जरिए तकनीकी मैपिंग की गई। एआई तकनीक द्वारा लगातार ट्रैकिंग और डेटा विश्लेषण के बाद जब यह पूरी तरह पुख्ता हो गया कि नर बाघ पीएन-103एम ही वह बाघ है, तब वन अमले ने बिना किसी गलती के आगे की कार्रवाई की। जिसे रेस्क्यू करने में सफलता मिली। बाघ के कैनाइन घिसे होने के कारण उसे वन विहार भोपाल भेज दिया गया है।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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