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संसद का मानसून सत्र खत्म, 12 विधेयक पास; सिर्फ एक पर चर्चा

संसद का मानसून सत्र गुरुवार 13 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ खत्म हो गया। पूरे सत्र में दिल्ली के Gen Z आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज और राम मंदिर चंदा चोरी के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना रहा। विपक्ष गृहमंत्री अमित शाह के जवाब और दोनों मुद्दों पर चर्चा की मांग करता रहा, जबकि सरकार ने चर्चा के लिए तैयार होने का दावा किया।
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संसद का मानसून सत्र खत्म, 12 विधेयक पास; सिर्फ एक पर चर्चा
संसद का मानसून सत्र खत्म

नई दिल्ली। सत्र के आखिरी दिन भी सदन में हंगामा जारी रहा और विपक्ष ने अमित शाह जवाब दो के नारे लगाए। केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष सदन से भागता रहा। वहीं राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष अमित शाह के भाषण में नहीं, बल्कि यह जानने में दिलचस्पी रखता है कि बच्चों पर गोली किसने चलवाई। सरकार ने बताया कि सत्र में कुल 12 बिल पास हुए, लेकिन चर्चा के लिहाज से लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत रही। इस बीच FCRA बिल को जेपीसी के पास भेज दिया गया, जबकि परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया गया।

अमित शाह के जवाब की मांग पर नहीं टूटा गतिरोध

मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार दिल्ली में हुए Gen Z आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज के मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान की मांग करता रहा। विपक्ष की दूसरी बड़ी मांग राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपों पर संसद में चर्चा कराने की थी। दोनों मुद्दों को लेकर सदन में लगातार नारेबाजी और हंगामा होता रहा। 10 अगस्त को केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि अमित शाह जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष को सदन में रहकर चर्चा सुननी होगी। इसके बाद भी गतिरोध खत्म नहीं हुआ। बुधवार को अमित शाह ने पहले मीडिया के सामने सरकार का पक्ष रखा और फिर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि सरकार सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है और वह यह भी चर्चा करना चाहते हैं कि विपक्ष को चर्चा क्यों नहीं चाहिए।

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राहुल गांधी ने अमित शाह के बयान पर किया पलटवार

अमित शाह के बयान के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष अमित शाह के भाषणों में रुचि नहीं रखता, बल्कि वह यह जानना चाहता है कि बच्चों पर गोली किसने चलवाई। इसी बयानबाजी के बीच संसद की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। गुरुवार को सत्र के आखिरी दिन भी लोकसभा में हंगामे के बीच कार्यवाही शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह दोनों सदन में मौजूद रहे। वंदे मातरम् का पूरा गायन होने के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। कांग्रेस के संगठन महासचिव और लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार के रवैये की वजह से मानसून सत्र वॉशआउट हो गया।

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सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसद परिसर में भी तकरार

सदन के भीतर हंगामे के साथ संसद परिसर में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद कई बार आमने-सामने दिखाई दिए। कई मौकों पर स्थिति संभालने के लिए सुरक्षा कर्मियों को बीच में आना पड़ा और दोनों पक्षों की ओर से जमकर नारेबाजी हुई। दिल्ली के लाठीचार्ज के मुद्दे पर विपक्षी सांसद अमित शाह सदन में आओ और अमित शाह जवाब दो, जवाब दो के नारे लगाते रहे। वहीं सत्र के आखिरी सप्ताह में झारखंड में हुए लाठीचार्ज के मुद्दे को लेकर एनडीए सांसदों ने विपक्ष को घेरा और राहुल गांधी जवाब दो, जवाब दो के नारे लगाए। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पूरे सत्र के दौरान सदन में नहीं आए और आखिरी दिन केवल वंदे मातरम् के लिए पहुंचे।

12 बिल पास हुए, चर्चा के लिहाज से सत्र कमजोर

केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने मानसून सत्र के प्रदर्शन को दो अलग-अलग नजरिए से देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि बिजनेस के लिहाज से सत्र अच्छा रहा और कुल 12 बिल पास हुए, लेकिन चर्चा के लिहाज से यह अच्छा नहीं रहा। उनके मुताबिक लोकसभा में 19 प्रतिशत और राज्यसभा में 39 प्रतिशत उत्पादकता दर्ज हुई। रिजिजू ने कहा कि लोकसभा में नकल रोकने से जुड़े बिल पर ही चर्चा हो सकी और इसके अलावा अच्छी चर्चा नहीं हो पाई। उन्होंने अपने तीन दशक के संसदीय अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि यह पहली बार है जब सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष चर्चा से पीछे हट गया। उन्होंने कांग्रेस सांसदों पर नारे लगाने और कार्ड लेकर हंगामा करने को लेकर भी निशाना साधा।

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FCRA बिल जेपीसी को भेजा 

मानसून सत्र शुरू होने से पहले सरकार के कई अहम विधायी प्रस्तावों को लेकर चर्चा थी। इनमें परिसीमन और FCRA से जुड़े बिल भी शामिल थे। हालांकि विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बीच सरकार ने परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया। बुधवार को FCRA बिल को संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के पास भेज दिया गया। परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल के लिए सरकार ने बहुमत जुटाने की कोशिश की थी। इस दौरान टीएमसी और आम आदमी पार्टी में संभावित टूट के दावे भी सामने आए। कई रिपोर्टों में डीएमके के रुख बदलने और शरद पवार की पार्टी से संपर्क किए जाने की बात भी कही गई थी। हालांकि सत्र खत्म होने तक इन राजनीतिक समीकरणों के बावजूद सरकार परिसीमन के प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ा सकी और संसद का मानसून सत्र हंगामे के बीच खत्म हो गया।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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