Naresh Bhagoria
15 Jan 2026
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15 Jan 2026
Manisha Dhanwani
15 Jan 2026
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15 Jan 2026
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र इस बार शुरू से ही हंगामे की भेंट चढ़ गया है। विपक्षी दलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और बिहार में मतदाता सूची सत्यापन (SIR) के मुद्दे पर सरकार को घेरा हुआ है। इसी बीच अब साफ हो गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर लोकसभा में 28 जुलाई और राज्यसभा में 29 जुलाई को चर्चा होगी, जिसमें दोनों सदनों के लिए 16-16 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।
इस बहुप्रतीक्षित बहस से पहले सरकार ने रणनीतिक स्तर पर उच्चस्तरीय तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं, विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग की है। संसद परिसर में काली कमीज और पट्टी पहनकर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला है।
संसद के पहले तीन दिन लगातार हंगामे की भेंट चढ़ चुके हैं। विपक्षी दलों ने ऑपरेशन सिंदूर और बिहार के मतदाता सत्यापन (SIR) को लोकतंत्र के खिलाफ बताया है। बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि, “सरकार कहती है ऑपरेशन सिंदूर चालू है, जबकि डोनाल्ड ट्रम्प 25 बार कह चुके हैं कि उन्होंने सीजफायर कराया। पीएम मोदी इस पर चुप क्यों हैं?”
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका दावा कर रहा है कि उसने ऑपरेशन रुकवाया है, तो भारत की सरकार इस पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रही? उन्होंने कहा, “दाल में कुछ काला है।”
‘INDIA’ गठबंधन के सांसदों ने बुधवार को संसद भवन परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने काले कपड़े और पट्टियां पहनकर ‘मोदी सरकार हाय-हाय’ के नारे लगाए। प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई सांसद शामिल हुए। उन्होंने बिहार SIR और ऑपरेशन सिंदूर पर तत्काल चर्चा की मांग दोहराई।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “SIR के जरिए भाजपा उन लोगों का वोट छीनना चाहती है जो उन्हें वोट नहीं करते। यह वोटबंदी की साजिश है, जिसे हम नहीं चलने देंगे।”
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में तय हुआ कि लोकसभा में 28 जुलाई और राज्यसभा में 29 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा होगी। दोनों सदनों में 16-16 घंटे की बहस के लिए समय तय किया गया है। बैठक में विपक्षी दलों ने अन्य मुद्दों पर शॉर्ट ड्यूरेशन डिस्कशन की मांग भी रखी, लेकिन सरकार ने प्रधानमंत्री के विदेश दौरे का हवाला देते हुए 24 जुलाई को चर्चा शुरू करने से इनकार कर दिया। विपक्षी दलों ने यह भी मांग की कि अब से BAC की बैठक हर हफ्ते होनी चाहिए।
सरकार इस बहस के लिए कमर कस चुकी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने CDS जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, “सरकार पूरी आक्रामकता के साथ संसद में अपना पक्ष रखने की रणनीति पर काम कर रही है।” इस चर्चा से दो दिन पहले 26 जुलाई को ‘करगिल विजय दिवस’ भी है, जिसे सरकार सामरिक उपलब्धियों और राष्ट्रीय सुरक्षा के संदेश के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है।
विपक्षी दलों ने स्पष्ट कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सदन में उपस्थित रहना चाहिए। ऐसे में इस चर्चा के दौरान तीनों नेताओं की मौजूदगी भी संभावित मानी जा रही है।