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पन्ना के हीरों को जल्द मिलेगा GI टैग, ब्रांड लोगो के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतरने की तैयारी

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पन्ना के हीरों को जल्द मिलेगा GI टैग, ब्रांड लोगो के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतरने की तैयारी

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के विश्वप्रसिद्ध हीरे अब वैश्विक बाजार में एक ब्रांड के रूप में अपनी खास पहचान बनाने की ओर अग्रसर हैं। इन हीरों को जल्द ही ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ यानी जीआई टैग मिलने की संभावना है। इसके लिए अंतिम चरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चेन्नई स्थित इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडिया कार्यालय ने पन्ना के हीरों से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी थी, जिसे जिला खनिज कार्यालय ने भेज दिया है। अब केवल लोगो का डिज़ाइन भेजा जाना शेष है, जो एक-दो दिन में भेजा जाएगा।

हीरे अब बिकेंगे ब्रांड टैग के साथ

जीआई टैग मिलने के बाद पन्ना के हीरे न केवल कानूनी मान्यता प्राप्त करेंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांड लोगो के साथ बेचे जाएंगे। इस टैग से यह सुनिश्चित होगा कि पन्ना के नाम पर किसी अन्य क्षेत्र का हीरा न बेचा जाए। इससे इन हीरों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को प्रमाणित और विश्वसनीय हीरे मिल सकेंगे।

कलेक्टर ने बताया GI टैग से क्या होगा फायदा

पन्ना कलेक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि जीआई टैग से पन्ना के हीरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक विशिष्ट पहचान मिलेगी। साथ ही यह कानूनी अधिकार भी देगा कि पन्ना नाम का उपयोग कोई और क्षेत्र नहीं कर सकता। यह स्थानीय उत्पादकों को भी एक नई ताकत देगा और क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि पन्ना के हीरों की खासियत – हल्का हरा रंग और कार्बन लाइन – इन्हें कटिंग और चमक के लिहाज से अद्वितीय बनाती है।

2023 में हुआ था आवेदन, अगस्त तक पूरी हो सकती है प्रक्रिया

पन्ना के जिला खनिज अधिकारी रवि पटेल ने जानकारी दी कि जीआई टैग के लिए आवेदन वर्ष 2023 में किया गया था। टैग प्रक्रिया की शेष औपचारिकताएं अगस्त 2025 तक पूरी होने की संभावना है। इससे पहले चेन्नई कार्यालय ने भौगोलिक क्षेत्र, उत्पादन की मात्रा, उत्पादकों की संख्या और हीरों की विशेषताओं से जुड़ी जानकारी मांगी थी, जिसे भेजा जा चुका है।

क्या है जीआई टैग और क्यों होता है जरूरी

ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग किसी उत्पाद को उसके विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से जोड़ता है और उसकी गुणवत्ता या प्रतिष्ठा उस क्षेत्र की विशेषता मानी जाती है। टैग मिलने के बाद उस क्षेत्र के उत्पाद को एक विशिष्ट पहचान और कानूनी संरक्षण मिलता है। इससे नकली या घटिया उत्पादों पर रोक लगती है और उपभोक्ताओं को वास्तविक व प्रामाणिक उत्पाद मिलते हैं।

हीरे की विशेषताएं बनाती हैं उन्हें खास

पन्ना के हीरों की विशेष पहचान है उनका हल्का हरा रंग और कार्बन लाइन, जो इन्हें अन्य हीरों से अलग बनाती है। यह विशेषताएं कटिंग और चमक में उन्हें बेजोड़ बनाती हैं, जिसकी वजह से इनकी वैश्विक मांग लगातार बनी हुई है।

मध्यप्रदेश में कितने उत्पादों को मिला है GI टैग

वर्तमान में मध्यप्रदेश के 24 पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। इनमें गोंड पेंटिंग, ग्वालियर कालीन, डिंडोरी का लोहशिल्प, जबलपुर पत्थर शिल्प और बालाघाट की वारासिवनी साड़ी प्रमुख हैं। अब पन्ना के हीरे इस सूची में शामिल होने जा रहे हैं, जिससे न केवल राज्य को गौरव मिलेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक नया मुकाम भी मिलेगा।

Mithilesh Yadav
By Mithilesh Yadav

वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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