वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में रविवोर को आम बजट पेश किया था। जिसमें अर्थव्यवस्था, उद्योग, ऊर्जा और आम लोगों से जुड़ी कई अहम घोषणाएं की गईं। इन्हीं में से एक बड़ा फैसला स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने को लेकर लिया गया है।
बजट में सरकार ने बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर सीमा शुल्क में छूट देने का ऐलान किया है। इस फैसले का मकसद बायोगैस आधारित ईंधन के उत्पादन को सस्ता बनाना और इसकी आपूर्ति को आसान करना है, ताकि यह ईंधन आम उपभोक्ताओं तक कम कीमत पर पहुंच सके। सरकार का मानना है कि इससे पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता घटेगी और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार के मुताबिक, इस कदम से न सिर्फ ईंधन की लागत कम होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। बायोगैस आधारित ईंधन से कार्बन उत्सर्जन घटता है और कचरे से ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलता है, जिससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में देश को फायदा होगा। और आगे पर्यावरण भी जहरीले गैसों से सुरक्षित रहेगा।
सरकार के इस फैसले के बाद आम लोगों के मन में सवाल है कि आखिर बायो मिक्स सीएनजी क्या है और इसका इस्तेमाल कहां किया जाता है। बायो मिक्स सीएनजी दरअसल बायोगैस को शुद्ध कर बनाई गई गैस होती है, जिसे प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग वाहनों, रसोई गैस और औद्योगिक ईंधन के तौर पर किया जाता है।

बायो-मिक्स सीएनजी एक उन्नत और पर्यावरण-अनुकूल ईंधन है।
इसे बायोगैस और प्राकृतिक गैस (CNG) को मिलाकर तैयार किया जाता है।
बायोगैस जैविक कचरे से बनती है, जैसे कृषि अवशेष, गोबर, फूड वेस्ट और अन्य जैविक पदार्थ।
इससे एक स्थिर, सुरक्षित और स्वच्छ ईंधन तैयार होता है।
बायो-मिक्स सीएनजी का उपयोग वाहनों, उद्योगों और ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकता है।
यह ईंधन प्रदूषण कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद करता है।
सबसे पहले जैविक कचरे जैसे गोबर, कृषि अवशेष और फूड वेस्ट से बायोगैस तैयार की जाती है।
तैयार बायोगैस को शोधन प्रक्रिया से गुजारा जाता है।
इस प्रक्रिया में गैस से नमी, कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य अशुद्धियां हटाई जाती हैं।
शुद्ध की गई बायोगैस की गुणवत्ता और ऊर्जा क्षमता को जांचा जाता है।
इसके बाद शुद्ध बायोगैस को तय अनुपात में प्राकृतिक गैस (CNG) के साथ मिलाया