Manisha Dhanwani
30 Nov 2025
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30 Nov 2025
Manisha Dhanwani
29 Nov 2025
28 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में हुए 'ऑपरेशन महादेव' के दौरान मारे गए तीन आतंकियों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि ये आतंकी स्थानीय नहीं, बल्कि पाकिस्तानी नागरिक थे। उन्होंने यह दावा आतंकियों से बरामद छह अहम सबूतों के आधार पर किया है, जो पाकिस्तान के आधिकारिक डाटाबेस से मेल खाते हैं।
एनकाउंटर साइट से बरामद दस्तावेजों में पाकिस्तानी चुनाव आयोग द्वारा जारी वोटर आईडी स्लिप शामिल है, जो लाहौर और गुजरांवाला की वोटर लिस्ट से मेल खाती है। इसके अलावा, आतंकियों के फिंगरप्रिंट, चेहरे की पहचान और फैमिली डिटेल्स पाकिस्तान के नेशनल डेटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी (NADRA) से भी मैच कर गईं। यही नहीं, एक खून से सनी शर्ट से प्राप्त DNA सैंपल्स की जांच में भी तीनों आतंकियों की पहचान पाकिस्तानी नागरिकों के रूप में हुई है।
सुरक्षा एजेंसियों को आतंकियों के पास से एक सैटेलाइट फोन भी मिला, जिससे हुई कॉल्स और GPS लोकेशन की जांच की गई। कॉल रिकॉर्ड्स से स्पष्ट हुआ कि फोन पाकिस्तान में सक्रिय नेटवर्क से जुड़ा था। GPS डेटा से यह भी सामने आया कि आतंकी नियंत्रण रेखा पार कर भारत में दाखिल हुए थे।
एक और रोचक सुराग उन चॉकलेट रैपर्स से मिला जो एनकाउंटर स्थल से बरामद हुए। जांच में पता चला कि ये चॉकलेट मई 2024 में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद से भेजे गए थे। इसके अलावा, घटनास्थल से मिले गोलियों के खोखे भी उन राइफलों से मेल खाते हैं जो आतंकियों के पास थीं।
जब इस पूरे मामले पर सेना से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो सेना के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन से पहले सेना ने किसी प्रकार की खुफिया जानकारी साझा नहीं की थी। सेना का कहना है कि उन्हें इस ऑपरेशन की योजना और खुफिया संकेतों की जानकारी नहीं थी।