भोपाल। मप्र विधानसभा का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होगा। यह सत्र सिर्फ पांच दिन का है। सत्र के दो महत्वपूर्ण बिल रखे जाएंगे। इनमें से एक नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव से संबंधित है जबकि दूसरा दुकान और संस्थान संशोधन विधेयक 2025 में बदलाव का प्रस्ताव है। ये दोनों प्रस्ताव कैबिनेट से मंजूर किए जा चुके हैं। विधानसभा में ये बिल प्रस्तुत किए जाएंगे। यहां चर्चा के बाद बिल पास होते ही कानून बन जाएंगे और बदले हुए नियम पूरे प्रदेश में लागू हो जाएंगे।
नगर पालिका और नगर परिषद में अभी अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के द्वारा किया जाता है। नए संशोधन के तहत नगर पालिका या नगर परिषद क्षेत्र के मतदाता अध्यक्ष का चुनाव सीधे चुन सकेंगे। दरअसल पिछली बार ही अप्रत्यक्ष प्रणाली से अध्यक्ष चुने गए थे, उससे पहले अध्यक्ष का चुनाव इन नगरीय निकायों में सीधे ही किया जाता रहा है, यानी जनता ही अध्यक्ष का चुनाव करती थी। अब फिर से वही नियम बनने जा रहा है। नए कानून के अनुसार अगर जनता को अध्यक्ष से कामकाज की नाराजगी हो तो राइट टू रिकॉल की व्यवस्था भी रहेगी। यानी जनता वोट देकर अध्यक्ष को हटा भी सकती है।
सरकार दुकान एवं संस्थान एक्ट में भी बदलाव करने जा रही है। इसमें दुकानदार व कामगारों के लिए हफ्ते में एक दिन छुट्टी देना जरूरी होगा। इस तरह अब दुकान में काम करने वाले या संस्थान के कामगारों से सप्ताह में छह दिन ही काम लिया जा सकेगा। वहीं सरकार दुकान खोलने के गुमास्ता लाइसेंस लेने की प्रक्रिया में सख्ती करने जा रही है। वर्तमान में लाइसेंस फीस 100 से 500 रु. है। इसे बढ़ाकर 5,000 रुपए किया जा रहा है। इसके साथ ही बड़ी दुकान, होटलों की फीस ज्यादा बढ़ाई जा सकती है।
सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा छिंदवाड़ा के सिरप कांड, खाद की किल्लत, प्रदेश में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर चर्चा करने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। इन मुद्दों पर प्रदर्शन की भी संभावना है। हालांकि सिर्फ 5 दिन और 4 बैठकों के सत्र को बढ़ाने की मांग कांग्रेस ने की थी, लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है।