रिटायरमेंट के बाद बस्तियां बनीं परिवार, बच्चों की मुस्कान में मिली त्योहारों की खुशी - 80 से 100 बच्चों संग मनाएंगे दिवाली

सागर यादव, ग्वालियर। बेसहारों की मदद करना रिटायर्ड शिक्षक ओमप्रकाश दीक्षित के लिए जुनून बन चुका है। बच्चों के साथ त्योहार मनाना अब उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा है। शिक्षक की नौकरी से रिटायर होने के बाद उन्हें घर पर अकेलापन महसूस होने लगा था।
बच्चों से लंबे समय तक जुड़ाव रहा, इसलिए उन्होंने सोचा कि अब अपना समय जरूरतमंद बच्चों के बीच बिताया जाए। इसी सोच के साथ वर्ष 2020 से वे लगातार इन बच्चों के लिए काम कर रहे हैं। अब बस्तियों के बच्चों को ही अपना परिवार मानकर उनके साथ त्योहार मनाते हैं।
ओमप्रकाश दीक्षित से चर्चा
बच्चों के साथ दिवाली मनाने का विचार कहां से आया?
बच्चों से लगाव काफी लंबे समय से है। शिक्षक था, इसलिए हमेशा बच्चों के बीच रहा और उनसे जुड़ाव बन गया। अब अपना जीवन उनके लिए ही समर्पित करने की सोच है। रिटायर होने पर तय कर लिया था कि आगे भी इन्हीं के बीच रहूंगा।
यह पहला आयोजन है या हर साल ऐसा करते हैं?
आयोजन कहां होगा? कई बार इनके साथ त्योहार मना चुके हैं। अब इनसे दूर होकर कोई खुशी मनाने का मन नहीं करता। इस बार भी इनके साथ ही दिवाली मनानी है। शहर में कई बस्तियां हैं, जहां जरूरतमंदों को हमारा इंतजार रहता है। उन्हीं के बीच जाकर त्योहार मनाते हैं।
कितने बच्चे शामिल होंगे?
उन्हें क्या उपहार देंगे और वृद्धाश्रमों के लिए क्या योजना है? इस बार दिवाली पर करीब 80 से 100 बच्चों के साथ त्योहार मनाने की तैयारी है। बच्चों के लिए पटाखे, मिठाई, कपड़े और उपहार लेकर बस्तियों में पहुंचेंगे। उनके साथ दीये जलाएंगे, मिठाई बांटेंगे और समय बिताएंगे। इसमें कई संस्थाएं मदद करती हैं। उनके बिना यह संभव नहीं है। सभी के सहयोग से ही बच्चों की दिवाली खास बन पाती है।
इसके साथ ही वृद्धाश्रमों में जाकर बुजुर्गों के साथ भी दिवाली मनाने की योजना है। उन्हें मिठाई, कपड़े और जरूरत का सामान बांटेंगे, ताकि वे भी खुद को अकेला महसूस न करें।




















