ग्वालियर में स्वच्छता की दिवाली एक रुपए वाली पहल बनी जरूरतमंदों का सहारा, 25 हजार से ज्यादा उपयोगी सामान बांटे गए
ग्वालियर। इस अभियान के तहत जरूरतमंद परिवारों को महज एक रुपए में टीवी, फ्रिज, आरओ, ट्रॉली बैग, बच्चों की साइकिल, जूते, खिलौने और कपड़ों सहित अनेक उपयोगी वस्तुएं उपलब्ध कराई गईं।

घरों की अनुपयोगी वस्तुएं बनीं जरूरतमंदों के लिए खुशियों का उपहार
नगर निगम ने इस अभियान की शुरुआत 21 अक्टूबर को की थी। इसका उद्देश्य घरों में लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी, लेकिन इस्तेमाल के योग्य वस्तुओं को कचरे में जाने से बचाकर जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाना था। इसके लिए निगम की टीमों ने घर-घर संपर्क कर नागरिकों से उपयोगी सामग्री दान करने की अपील की। शहरवासियों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाते हुए बड़ी संख्या में सामान दान किया गुरुवार को बाल भवन में नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी एवं अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव ने प्रतीकात्मक रूप से 20 से 25 जरूरतमंद नागरिकों को एक रुपए में सामग्री वितरित कर अभियान का शुभारंभ किया। इसके बाद नगर निगम के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में भी वितरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर उपायुक्त मुकेश बंसल, कार्यपालन यंत्री शैलेंद्र सक्सेना, कार्यक्रम कोऑर्डिनेटर विजेता सिंह चौहान एवं कंसल्टेंट देवेंद्र निम उपस्थित रहे।
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सुमन का फ्रिज खरीदने का सपना पूरा, ओमवती को मिली टीवी
अभियान के दौरान कई परिवारों की वर्षों पुरानी जरूरतें पूरी हुईं। गोल पहाड़िया निवासी सुमन कुशवाह ने डबल डोर फ्रिज खरीदा, वहीं ओमवती वाल्मीकि को कलर टीवी मिली। ममता गौड़ ने आरओ और इरफान ने पलंग खरीदा। वहीं देवांश को साइकिल मिलने से उसकी खुशी देखते ही बनी।
पिछले साल से पांच गुना अधिक सामग्री का संग्रहण
नगर निगम की इस पहल को शहरवासियों का शानदार सहयोग मिला। पिछले वर्ष जहां लगभग 5 हजार उपयोगी वस्तुओं का संग्रहण हुआ था, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर 25 हजार से अधिक पहुंच गया। सभी वस्तुओं को निगम के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में व्यवस्थित रूप से एकत्रित किया गया। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि एक परिवार के लिए अनुपयोगी हो चुकी वस्तु दूसरे परिवार की जरूरत पूरी करने का माध्यम बनी। इससे न केवल कचरा कम करने और वस्तुओं के पुनः उपयोग को बढ़ावा मिला, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को सम्मानपूर्वक अपनी पसंद का सामान प्राप्त करने का अवसर भी मिला। नगर निगम की यह पहल स्वच्छता, सामाजिक सहभागिता और मानवीय संवेदनाओं का अनूठा उदाहरण बन गई।






















