सिर्फ 99 से शुरू करें रिटायरमेंट की तैयारी! गिग वर्कर्स के लिए NPS का खास मॉडल, जानिए कैसे बनेगा बड़ा फंड

आज के समय में लाखों लोग डिलीवरी, कैब, फूड डिलीवरी, ऑनलाइन सर्विस और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए काम कर रहे हैं। ऐसे काम को आमतौर पर गिग वर्क कहा जाता है। इस तरह के काम में कमाई अक्सर बुकिंग और काम की उपलब्धता पर निर्भर करती है। ऐसे में भविष्य के लिए बचत और रिटायरमेंट प्लानिंग बेहद जरूरी हो जाती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए NPS का एक खास मॉडल पेश किया है। इसमें काम करने वाले लोग कम रकम से भी रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू कर सकते हैं। PFRDA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी गिग वर्कर्स को NPS से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है।
क्या है NPS और गिग वर्कर्स के लिए क्यों है खास?
NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम लंबे समय के लिए रिटायरमेंट फंड तैयार करने की योजना है। इसमें व्यक्ति अपनी कमाई का कुछ हिस्सा नियमित रूप से निवेश कर सकता है। लंबे समय तक निवेश जारी रहने पर जमा रकम पर रिटर्न और कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है। गिग वर्कर्स के लिए इसकी खासियत यह है कि वे अपनी सुविधा और क्षमता के अनुसार योगदान कर सकते हैं। यानी हर महीने बड़ी रकम जमा करना जरूरी नहीं है। PFRDA के मुताबिक, इस मॉडल के तहत योगदान की कोई तय न्यूनतम या अधिकतम सीमा नहीं रखी गई है। हालांकि, किसी प्लेटफॉर्म और वर्कर के बीच हर योगदान के लिए न्यूनतम रकम को लेकर आपसी सहमति हो सकती है।
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PFRDA ने पेश किया ‘NPS ई-श्रमिक मॉडल’
PFRDA ने 29 अक्टूबर 2025 को जारी एक सर्कुलर के जरिए गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए NPS ई-श्रमिक मॉडल पेश किया था। यह मॉडल उन लोगों के लिए बनाया गया है जो किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए यूजर्स को सेवाएं देते हैं और सर्विस कॉन्ट्रैक्ट के तहत काम करते हैं। इसमें डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सेवाएं देने वाले और इस तरह के अन्य गिग वर्कर्स शामिल हो सकते हैं। इस मॉडल का उद्देश्य ऐसे कामगारों को रिटायरमेंट के लिए व्यवस्थित तरीके से बचत और निवेश का विकल्प देना है।
NPS में योगदान कौन करेगा?
ई-श्रमिक मॉडल की एक खास बात यह है कि इसमें योगदान करने के कई विकल्प दिए गए हैं।
- पहला विकल्प- वर्कर और डिजिटल प्लेटफॉर्म मिलकर NPS में योगदान कर सकते हैं।
- दूसरा विकल्प- सिर्फ गिग वर्कर अपने स्तर पर NPS में पैसे जमा कर सकता है।
- तीसरा विकल्प- वर्कर की तरफ से पूरा योगदान डिजिटल प्लेटफॉर्म या एग्रीगेटर भी कर सकता है। इससे गिग वर्कर्स को अपनी परिस्थिति के अनुसार रिटायरमेंट की तैयारी करने का विकल्प मिलता है।
99 से शुरू हो सकती है निवेश की मिसाल
इस मॉडल को समझने के लिए 99 महीने के निवेश का उदाहरण लिया जा सकता है। मान लीजिए कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र में NPS में हर महीने 99 जमा करना शुरू करता है और अगले 35 साल तक लगातार निवेश करता है। इस हिसाब से वह 35 वर्षों में अपनी जेब से कुल करीब 41,580 जमा करेगा। अब अगर इस निवेश पर औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलने की कल्पना की जाए, तो 35 साल बाद अनुमानित कॉर्पस करीब 5.45 लाख हो सकता है। इस अनुमान में करीब ₹5.03 लाख कंपाउंडिंग से मिलने वाला अनुमानित फायदा बताया गया है।
5.45 लाख के कॉर्पस का क्या होगा?
ऊपर दिए गए अनुमान के मुताबिक, रिटायरमेंट के समय बने करीब ₹5.45 लाख के कॉर्पस को दो हिस्सों में इस्तेमाल करने का उदाहरण दिया गया है। 60% रकम एकमुश्त- कॉर्पस का 60% हिस्सा यानी करीब ₹3.27 लाख एकमुश्त निकाला जा सकता है। 40% रकम एन्युटी में- बाकी 40% यानी करीब ₹2.18 लाख एन्युटी खरीदने में लगाया जा सकता है। एन्युटी का उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद नियमित आय उपलब्ध कराना होता है।
1,181 महीने की पेंशन का अनुमान कैसे?
अगर 2.18 लाख की एन्युटी पर 6.50% सालाना रिटर्न का अनुमान लगाया जाए, तो इससे करीब 1,181 प्रति महीने की पेंशन बनने का उदाहरण दिया गया है। हालांकि, वास्तविक पेंशन की रकम कई बातों पर निर्भर करेगी। इसमें एन्युटी का प्रकार, उस समय उपलब्ध दरें और चुनी गई योजना जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। इसलिए इसे निश्चित पेंशन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
छोटी रकम, लेकिन लंबा निवेश हो तो फायदा
NPS का सबसे बड़ा फायदा लंबे समय तक निवेश करने में हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति कम उम्र में निवेश शुरू करता है तो उसके पास पैसे को लंबे समय तक बढ़ने का मौका रहता है। इसी वजह से ₹99 जैसी छोटी रकम से शुरुआत करने का उदाहरण दिया गया है। यहां असली बात सिर्फ ₹99 नहीं, बल्कि जल्दी शुरुआत और लंबे समय तक निवेश जारी रखना है। गिग वर्कर्स की आय हर महीने एक जैसी नहीं होती। ऐसे में नियमित बचत करना चुनौती हो सकता है। लेकिन कम रकम से शुरुआत करके धीरे-धीरे योगदान बढ़ाने का तरीका भविष्य की आर्थिक सुरक्षा बनाने में मदद कर सकता है।
गिग वर्कर्स के लिए क्यों जरूरी है रिटायरमेंट प्लान?
गिग वर्क में पारंपरिक नौकरी की तरह हर जगह PF या रिटायरमेंट बेनिफिट की सुविधा नहीं मिलती। काम की उपलब्धता भी प्लेटफॉर्म और बुकिंग पर निर्भर हो सकती है। ऐसे में कमाई के समय थोड़ा पैसा भविष्य के लिए अलग रखना महत्वपूर्ण हो जाता है। आज की कमाई सिर्फ आज के खर्च के लिए नहीं, बल्कि आने वाले कल के लिए भी होनी चाहिए। NPS ई-श्रमिक मॉडल इसी सोच के साथ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को रिटायरमेंट प्लानिंग से जोड़ने की कोशिश है।











