PU Special :Higher Education-कंप्यूटर साइंस में नहीं मिली तो छोड़ दी फ्री की सीट, EWS की 60 फीसदी सीटें खाली

रामचन्द्र पाण्डेय, भोपाल। इंजीनियरिंग में कंप्यूटर साइंस (सीएस) की बढ़ती लोकप्रियता का असर अब प्रवेश के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। रोजगार और बेहतर प्लेसमेंट की संभावनाओं को देखते हुए विद्यार्थी कंप्यूटर साइंस और इससे जुड़ी तकनीकी शाखाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। दूसरी ओर, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं। प्रवेश के आंकड़ों के अनुसार इंजीनियरिंग की 76,862 सीटों में ईडब्ल्यूएस के लिए 7,130 सीटें निर्धारित हैं, लेकिन इनमें अब तक केवल 2,873 प्रवेश हुए हैं। यानी करीब 60 प्रतिशत सीटें खाली हैं। वहीं एमबीए की 55,009 सीटों में ईडब्ल्यूएस के लिए निर्धारित 4,843 सीटों के मुकाबले केवल 568 प्रवेश हुए हैं। विद्यार्थियों की पसंद को देखते हुए कॉलेजों में भी पिछले कुछ सालों में कंप्यूटर साइंस और इससे जुड़ी विशेषज्ञ शाखाओं में सीटें बढ़ाई गई हैं।
डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसी ब्रांच का विस्तार
वर्ष 2021 की उपलब्ध सीट मैट्रिक्स में कई निजी कॉलेजों में सीएसई की 60 से 240 तक सीटें थीं। मौजूदा सीट संरचना में सीएसई के साथ एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसी विशेषज्ञ शाखाओं का भी विस्तार हुआ है। प्रदेश में कंप्यूटर साइंस का क्रेज बढ़ने के साथ पिछले पांच वर्षों में सरकारी और निजी कॉलेजों ने बीटेक, बीसीए और बीएससी-सीएस सहित कंप्यूटर से जुड़े पाठ्यक्रमों में सीटें बढ़ाई हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2021-22 में प्रदेश में कंप्यूटर से जुड़े पाठ्यक्रमों में करीब 35 हजार सीटें थीं, जो 2025-26 में बढ़कर 60 हजार के पार पहुंच गईं। भोपाल में मैनिट, बीयू और आरजीपीवी से संबद्ध कॉलेजों में भी एआई, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसी नई ब्रांच शुरू हुई हैं।
पसंदीदा ब्रांच नहीं मिलने से घटे एडमिशन
इंजीनियरिंग की कुल सीटों में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं। इसका एक प्रमुख कारण रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए विद्यार्थियों का चुनिंदा और पसंदीदा ब्रांच की ओर बढ़ता रुझान माना जा रहा है। मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या भी पिछले वर्षों में घटी है। विधानसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 2015-16 से 2024-25 के बीच 69 कॉलेज काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर हुए हैं।
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फैक्ट फाइल
तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की स्थिति
कोर्स — कुल सीटें — प्रवेश
बीटेक — 76,862 — 49,151
लेटरल एंट्री बीटेक — 24,751 — 9,284
लेटरल एंट्री डिप्लोमा —15,106 — 6,090
एमबीए — 55,009 — 34,176
एमसीए — 6,444 — 3,622
एआईटीसी — 8,683 — 4,108
डिप्लोमा कोर्स — 35,493 — 23,700
इस वर्ष ईडब्ल्यूएस में प्रवेश की स्थिति
कोर्स — कुल सीटें — ईडब्ल्यूएस सीटें — प्रवेश
इंजीनियरिंग — 76,862 — 14,867 — 5,946
एमबीए — 55,009 — 4,843 — 568
नोट : इंजीनियरिंग के ईडब्ल्यूएस आंकड़ों को सत्यापित करें। मुख्य कॉपी में ईडब्ल्यूएस की 7,130 सीटें और 2,873 प्रवेश दिए गए हैं, जबकि इस फैक्ट फाइल में 14,867 सीटें और 5,946 प्रवेश दिए गए हैं।

एक्सपर्ट व्यू : सीएम में प्लेसमेंट और स्वरोजगार के अवसर बढ़े
एक्सपर्ट और समाजसेवी मनीष कुमार द्विवेदी ने कहा कि प्लेसमेंट और आईटी सेक्टर में रोजगार के अवसरों के कारण विद्यार्थी कंप्यूटर फील्ड को पहली पसंद बना रहे हैं। इसके चलते पसंदीदा सीएस ब्रांच नहीं मिलने पर विद्यार्थी दूसरी ब्रांच में प्रवेश लेने से बच रहे हैं। वर्तमान समय में सीएस के क्षेत्र में प्लेसमेंट के साथ स्वरोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
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रोजगार के कारण सीएसई की ओर रुझान
यूआईटी आरजीपीवी के डायरेक्टर प्रोफेसर एसएस भदोरिया ने कहा कि कंप्यूटर साइंस में रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध हैं। कंपनियां भी सीएसई के विद्यार्थियों को अच्छे पैकेज दे रही हैं। वहीं सरकारी क्षेत्र में भी रोजगार के अनेक अवसर हैं। इसी कारण पिछले कुछ वर्षों में विद्यार्थियों का रुझान सीएसई की ओर बढ़ा है।




















