NGT सख्त: मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान को सीवेज प्रबंधन दुरुस्त करने के निर्देश, चार हफ्ते में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

भोपाल। शहरों से निकलने वाला बिना उपचारित सीवेज नदियों, तालाबों और झीलों में पहुंचा तो अब संबंधित राज्यों की जवाबदेही तय होगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान को सीवेज प्रबंधन की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने तीनों राज्यों से चार सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही दिसंबर 2026 तक पूरे किए जाने वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को तय समयसीमा में पूरा करने और उपचारित पानी के पुनः उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
तीनों राज्यों में उपचार क्षमता पर्याप्त नहीं
मंगलवार को न्यायिक सदस्य जस्टिस श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ में हुई सुनवाई के दौरान सामने आया कि तीनों राज्यों के कई शहरों में पैदा होने वाले सीवेज की तुलना में उपचार क्षमता पर्याप्त नहीं है। कई घर अब भी सीवेज नेटवर्क से जुड़े नहीं हैं। एसटीपी के निर्माण में देरी के साथ उपचारित पानी के पुनः उपयोग की व्यवस्था भी पूरी तरह प्रभावी नहीं है। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि बिना उपचारित सीवेज को जलस्रोतों या खुले स्थानों में छोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। राज्यों को सीवेज नेटवर्क का विस्तार करने के साथ एसटीपी का निर्माण, उनका पूरी क्षमता से संचालन और उपचारित पानी के दोबारा उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
तय समय पर एसटीपी नहीं बने तो लगेगी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति
अधिकरण ने दिसंबर 2026 तक पूरे होने वाले एसटीपी को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। यदि तय अवधि में निर्माण पूरा नहीं हुआ तो संबंधित निर्माण एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। उन पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मानकों के अनुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी लगाई जा सकती है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पहले निर्धारित समयसीमा समाप्त हो चुकी है। अब केवल आश्वासन के बजाय राज्यों को जमीन पर ठोस कार्रवाई करनी होगी। जलस्रोतों में सीवेज का प्रवाह रोकने और उपचारित पानी का उपयोग सीपीसीबी के दिशा-निर्देशों अथवा राज्य के निर्धारित मानकों के अनुसार सुनिश्चित करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 4 जनवरी 2027 को होगी।
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बरखेड़ा पठानी का एसटीपी छह माह से बंद
इधर, बरखेड़ा पठानी में करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया भेल का एसटीपी करीब छह महीने से बंद पड़ा है। इसके चलते आसपास गंदगी और बदबू की समस्या बनी हुई है। प्लांट की बदहाल स्थिति पर एनजीटी ने संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने प्रदेश सरकार, कलेक्टर, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम आयुक्त और भेल के जनसंपर्क अधिकारी को छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के नामित प्रतिनिधि और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि की संयुक्त समिति मौके का निरीक्षण करेगी। समिति को एसटीपी की वास्तविक स्थिति, बंद रहने के कारण और अब तक की गई कार्रवाई की तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करनी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।
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