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भोपाल के बड़े तालाब में सिंघाड़े की खेती पर NGT सख्त, पानी की नियमित जांच के निर्देश

भोपाल के बड़े तालाब में सिंघाड़े की खेती और कीटनाशकों के संभावित इस्तेमाल पर NGT ने सख्ती दिखाई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पानी की नियमित जांच, जबकि IARI को सिंघाड़े में कीटनाशक अवशेषों की जांच तीन महीने में पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
भोपाल के बड़े तालाब में सिंघाड़े की खेती पर NGT सख्त, पानी की नियमित जांच के निर्देश
बड़े तालाब में सिंघाड़े की खेती पर NGT सख्त

भोपाल। भोपाल के बड़े तालाब में सिंघाड़े की खेती के दौरान रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने अहम निर्देश जारी किए हैं। अधिकरण ने मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तालाब के पानी की नियमित जांच करने और कीटनाशक अवशेषों पर नजर रखने को कहा है। इसके साथ ही सिंघाड़े की खेती में पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बड़ा तालाब, जिसे अपर लेक भी कहा जाता है, भोपाल की पेयजल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। तालाब में कीटनाशकों के इस्तेमाल, जलकुंभी के फैलाव और जलीय जीवों पर पड़ने वाले संभावित असर से जुड़ी चिंताओं के बाद NGT ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की।

जलकुंभी और कीटनाशकों के इस्तेमाल पर उठे सवाल

मामले से जुड़ी एक रिपोर्ट में बड़े तालाब में सिंघाड़े की फसल पर रासायनिक कीटनाशकों के छिड़काव और जलकुंभी के तेजी से फैलने को लेकर चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि जलकुंभी का अधिक फैलाव पानी में घुलित ऑक्सीजन के स्तर को प्रभावित कर सकता है। इससे मछलियों सहित दूसरे जलीय जीवों को नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है। इन चिंताओं की जांच के लिए NGT ने एक संयुक्त समिति गठित की थी। इसमें वेटलैंड प्राधिकरण, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। समिति ने तालाब का निरीक्षण करने के साथ पानी के नमूने लेकर उनकी जांच भी कराई।

जांच में पानी के नमूनों में नहीं मिले कीटनाशक अवशेष

संयुक्त समिति ने 1 अक्टूबर 2026 को बैरागढ़ स्थित बोर वन पार्क के पास निरीक्षण किया। इस दौरान क्षेत्र में सिंघाड़े और कमल की खेती होती मिली। हालांकि, निरीक्षण के समय वहां कोई व्यक्ति कीटनाशकों का छिड़काव करते हुए नहीं मिला और न ही छिड़काव से जुड़े उपकरण दिखाई दिए। मौके पर मृत मछलियां भी नहीं मिलीं। निरीक्षण के दौरान लिए गए पानी के नमूने की जांच में घुलित ऑक्सीजन (DO) 6.1 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई। वहीं जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) 2.4 मिलीग्राम प्रति लीटर और रासायनिक ऑक्सीजन मांग (COD) 9.6 मिलीग्राम प्रति लीटर रही। विश्लेषण किए गए नमूने में फीकल कोलीफॉर्म और कीटनाशक अवशेष नहीं पाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी से अगस्त 2026 के बीच बैरागढ़ इंटेक वेल पर उपलब्ध आंकड़ों में घुलित ऑक्सीजन का औसत स्तर लगभग 6.49 मिलीग्राम प्रति लीटर और BOD का औसत स्तर करीब 1.45 मिलीग्राम प्रति लीटर रहा। संबंधित जांच में कीटनाशक अवशेष और भारी धातुएं भी नहीं मिलीं।

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एक नमूने से पूरे तालाब की स्थिति तय नहीं की जा सकती

जांच में कीटनाशक अवशेष नहीं मिलने के बावजूद NGT ने स्पष्ट किया कि किसी एक स्थान और एक समय पर लिए गए पानी के नमूने के आधार पर पूरे तालाब के बारे में निर्णायक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इससे यह निश्चित नहीं होता कि तालाब के दूसरे हिस्सों में भी कीटनाशकों के अवशेष मौजूद नहीं हैं। इसी वजह से अधिकरण ने नियमित निगरानी को जरूरी माना है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एहतियात के तौर पर पानी की जांच जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जल गुणवत्ता में होने वाले बदलावों और संभावित प्रदूषण का समय रहते पता लगाया जा सके।

अपर लेक में सिंघाड़े की खेती के लिए अनुमति नहीं

सुनवाई के दौरान मत्स्य विभाग ने बताया कि अपर लेक में सिंघाड़े की खेती के लिए विभाग की ओर से कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। न ही इस खेती के लिए पट्टा देने की अनुशंसा की गई है। विभाग ने जलकुंभी के घने फैलाव को लेकर भी चिंता जताई। इसके अनुसार, जलकुंभी तालाब के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकती है। इसके कारण पानी में घुलित ऑक्सीजन कम होने पर छोटी मछलियों की मृत्यु का खतरा भी पैदा हो सकता है।

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NGT ने दिए ये अहम निर्देश

1. खेती में पर्यावरणीय नियमों का पालन: भोपाल नगर निगम और कृषि विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि बड़े तालाब में सिंघाड़े की खेती लागू अनुमतियों और पर्यावरण सुरक्षा संबंधी शर्तों के अनुसार हो। भोज वेटलैंड के प्रभाव क्षेत्र में गतिविधियों को लेकर मध्यप्रदेश पर्यावरण विभाग के 16 मार्च 2022 के आदेश में निर्धारित प्रावधानों का पालन भी सुनिश्चित करना होगा।

2. सिंघाड़े की फसल की जांच: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) को सिंघाड़े में संभावित कीटनाशक अवशेषों और हानिकारक रसायनों का विश्लेषण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा पर इनके संभावित प्रभावों की जांच तीन महीने के भीतर पूरी करने को कहा गया है।

3. जैविक खेती को बढ़ावा: मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भोपाल नगर निगम नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इनका उद्देश्य जैविक खेती को प्रोत्साहित करना और रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना होगा। लोगों को यह भी बताया जाएगा कि कीटनाशक जल गुणवत्ता और जलीय जीवों को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं।

4. पानी की नियमित निगरानी: मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बड़े तालाब के पानी की नियमित जांच करेगा। इस निगरानी में कीटनाशक अवशेषों की मौजूदगी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि तालाब की जल गुणवत्ता और पर्यावरणीय स्थिति पर नजर रखी जा सके।

बड़े तालाब से भोपाल की बड़ी आबादी को पेयजल मिलता है। ऐसे में NGT के निर्देशों का मुख्य उद्देश्य तालाब की जल गुणवत्ता की निगरानी करना, जलीय पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखना और सिंघाड़े की खेती के दौरान पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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