सिर्फ 30-40 सेकंड लेट...छूट गया NEET! सेंटर के बाहर गिड़गिड़ाते रहे छात्र, फिर भी नहीं मिली एंट्री

NEET UG 2026 री-एग्जाम देशभर में कड़ी सुरक्षा और सख्त नियमों के बीच आयोजित किया गया। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के निर्देश के अनुसार दोपहर 1:30 बजे सभी परीक्षा केंद्रों के गेट बंद कर दिए गए। इसके बाद किसी भी छात्र को अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।
परीक्षा केंद्रों पर समय से पहले पहुंचे अभ्यर्थियों को प्रवेश दे दिया गया, जबकि कुछ छात्र मामूली देरी के कारण परीक्षा देने से वंचित रह गए। कई जगह छात्रों और उनके परिजनों ने अधिकारियों से अनुरोध किया, लेकिन नियमों के कारण किसी को राहत नहीं मिली।
बेंगलुरु में रो पड़ीं छात्राएं, वीडियो हुआ वायरल
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक भावुक कर देने वाला वीडियो सामने आया। यहां कुछ छात्राएं परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से कुछ मिनट देर से पहुंचीं। गेट बंद होने के कारण उन्हें अंदर प्रवेश नहीं मिला।
एंट्री न मिलने के बाद कई छात्राएं सेंटर के बाहर फूट-फूटकर रोने लगीं। वीडियो में छात्राओं को मायूस और परेशान हालत में देखा जा सकता है। इनमें से कई छात्राओं का कहना था कि उन्होंने पूरे साल परीक्षा की तैयारी की थी, लेकिन कुछ मिनट की देरी ने उनका सपना अधूरा छोड़ दिया। सबसे बड़ी बात यह रही कि ये वही छात्र थे, जिनकी पहले हुई परीक्षा रद्द हो गई थी और अब री-एग्जाम भी नहीं दे पाए।
भोपाल में 30-40 सेकंड की देरी भी बनी वजह
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी NEET री-एग्जाम के दौरान सख्ती देखने को मिली। सरोजिनी सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय और पीएमश्री सेंट्रल स्कूल समेत कई केंद्रों पर कुछ छात्र महज 30 से 40 सेकंड की देरी से पहुंचे थे।
छात्रों और उनके परिजनों ने अधिकारियों से बार-बार अनुरोध किया कि उन्हें परीक्षा में बैठने दिया जाए, लेकिन तय समय निकल जाने के कारण किसी को प्रवेश नहीं मिला।
गेट के बाहर खड़े कुछ छात्र काफी देर तक अधिकारियों से गुहार लगाते रहे। उनके परिजनों का कहना था कि रोल नंबर और परीक्षा कक्ष खोजने में समय लग गया, जिसके कारण वे कुछ सेकंड लेट हो गए।
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एडिशनल SP ने कहा- नियमों से बाहर जाकर नहीं कर सकते मदद
भोपाल में कई अभिभावक अधिकारियों से यह मांग करते नजर आए कि छात्रों को 2 से 4 मिनट की राहत दी जाए। उनका कहना था कि बच्चों की मानसिक स्थिति को देखते हुए थोड़ा लचीलापन दिखाया जाना चाहिए। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ कहा कि परीक्षा से जुड़े नियम NTA द्वारा तय किए गए हैं और स्थानीय प्रशासन उन्हें बदल नहीं सकता। एडिशनल एसपी ने भी परिजनों को समझाते हुए कहा कि छात्रों को अंदर भेजना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
गलत परीक्षा केंद्र पहुंचने से भी छूटी परीक्षा
कई छात्रों की परीक्षा सिर्फ देरी के कारण नहीं, बल्कि गलत परीक्षा केंद्र पहुंचने की वजह से भी छूट गई। भोपाल और छतरपुर में ऐसे कई मामले सामने आए जहां छात्र निर्धारित केंद्र की जगह किसी दूसरे केंद्र पर पहुंच गए। जब तक उन्हें अपनी गलती का पता चला और वे सही केंद्र तक पहुंचे, तब तक गेट बंद हो चुके थे।
छतरपुर का एक छात्र शहर के एक स्कूल में पहुंच गया, जबकि उसका असली परीक्षा केंद्र नौगांव में था, जो करीब 22 किलोमीटर दूर था। छात्र बाइक से तेजी से सही केंद्र तक पहुंचा, लेकिन तब तक निर्धारित समय निकल चुका था और उसे प्रवेश नहीं मिल पाया।
मुंबई में भी दो छात्रों को लौटना पड़ा घर
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में भी ऐसे मामले सामने आए। परेल स्थित महर्षि दयानंद कॉलेज में दो छात्र निर्धारित समय के बाद पहुंचे। कॉलेज प्रशासन ने NTA के नियमों का पालन करते हुए गेट बंद रखा और दोनों छात्रों को प्रवेश नहीं दिया। इसके बाद छात्रों और उनके परिवार वालों ने नाराजगी जताई, लेकिन नियमों के चलते कोई समाधान नहीं निकल सका।
बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम को बताया देरी की वजह
बेंगलुरु में चार छात्रों को परीक्षा केंद्र में एंट्री नहीं मिली। छात्रों के परिजनों ने आरोप लगाया कि शहर में आयोजित एक राजनीतिक रैली और ट्रैफिक जाम के कारण वे समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच पाए। परिजनों का कहना था कि पुलिस की ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होती तो छात्र समय पर पहुंच सकते थे। हालांकि परीक्षा केंद्र प्रशासन ने निर्धारित समय सीमा के बाद किसी को प्रवेश नहीं दिया।
नियमों पर अड़ा NTA, छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी
देशभर के कई परीक्षा केंद्रों पर छात्रों और उनके अभिभावकों ने एंट्री न मिलने पर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि सिर्फ एक-दो मिनट की देरी के कारण पूरे साल की मेहनत पर पानी फिर गया।
वहीं NTA का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय सीमा का सख्ती से पालन जरूरी है। इसी कारण 1:30 बजे के बाद किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं दिया गया।
केंद्रों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम
परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। परीक्षा केंद्रों के आसपास लगभग 200 मीटर के दायरे में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। कई जगह पूरे इलाके को खाली कराया गया और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 163 लागू की गई।











