‘पापा को छोड़ दूंगी, तुम्हारे साथ रहूंगी बेटा...’ मां की आखिरी पुकार भी नहीं रोक पाई बेटे को, उजड़ गया पूरा परिवार

छत्रपति संभाजीनगर के खवड्या पहाड़ से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर दिया है। 16 साल के बेटे कुणाल को बचाने के लिए उसकी मां ने आखिरी वक्त तक उसे समझाने की कोशिश की। यहां तक कि उसने बेटे से कहा कि अगर पिता से ही परेशानी है तो वह उन्हें छोड़कर उसके साथ रहने को तैयार है। लेकिन कुणाल इतना परेशान था कि मां की बात भी उसे रोक नहीं सकी। इस घटना में कुणाल के साथ उसके माता-पिता की भी मौत हो गई और एक पल में पूरा परिवार खत्म हो गया।
92 प्रतिशत नंबर लाया था कुणाल, डॉक्टर बनना चाहता था
कुणाल चांदगुडे जालना जिले के अंबड तालुका के धनगर पिंपलवाड़ी गांव का रहने वाला था। चांदगुडे परिवार पिछले करीब 18 साल से इसी इलाके में रह रहा था। कुणाल पढ़ाई में काफी अच्छा था। उसने हाल ही में 10वीं की परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। इसके बाद उसने 11वीं कक्षा में दाखिला लिया था। उसका सपना आगे चलकर डॉक्टर बनने का था। परिवार को भी बेटे से काफी उम्मीदें थीं। किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही समय बाद परिवार पर ऐसा दुख टूट पड़ेगा। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से कुणाल और उसके पिता के बीच पैसों को लेकर तनाव चल रहा था। मोबाइल के खर्च और उसकी EMI को लेकर भी दोनों के बीच कहासुनी होती थी। कुणाल को अपने खर्च के लिए पैसे नहीं मिल रहे थे और महंगे iPhone की किस्त को लेकर भी परिवार में तनाव था। धीरे-धीरे पिता और बेटे के बीच कड़वाहट बढ़ती गई।
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शुक्रवार को फिर हुआ पिता से झगड़ा
शुक्रवार दोपहर पैसों को लेकर कुणाल की अपने पिता से बहस हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि कुणाल गुस्से में अपना iPhone, हाथ की घड़ी और गले की चांदी की चेन निकालकर फेंकने के बाद घर से निकल गया। कुणाल को इस हालत में देखकर उसके माता-पिता भी घबरा गए और उसके पीछे-पीछे चले गए। दोनों लगातार उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे। खवड्या पहाड़ पर कुणाल बेहद परेशान हालत में था। मां अपने बेटे को वापस आने के लिए लगातार समझाती रही। मां ने उससे कहा कि अगर उसे अपने पिता से ही परेशानी है तो वह अपने पति को छोड़ने तक के लिए तैयार है। उसने बेटे से कहा कि वह अपना मंगलसूत्र तक उतार देगी और उसके साथ रहेगी, लेकिन वह उसे छोड़कर न जाए। मां की इस भावुक अपील में एक मां की पूरी बेबसी दिखाई दे रही थी। वह किसी भी तरह अपने बेटे को बचाना चाहती थी।
‘मेरी कोई बात नहीं सुनता...’ मां से बोला था कुणाल
कुणाल उस वक्त बेहद गुस्से और तनाव में था। उसने अपनी मां से कहा कि उसकी कोई बात नहीं सुनता और किसी को उसकी जिंदगी की परवाह नहीं है। मां लगातार उसे समझाती रही और वापस चलने के लिए कहती रही। लेकिन हालात संभल नहीं सके और कुणाल ने अपनी जान गंवा दी।
बेटे को बचाने की कोशिश में माता-पिता भी हादसे का शिकार
बेटे को बचाने की कोशिश में उसके माता-पिता भी हादसे का शिकार हो गए। दोनों बेटे की तरफ बढ़े, लेकिन संतुलन बिगड़ने के कारण वे भी गहरी खाई में जा गिरे। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कुणाल के परिवार की कहानी ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। जिस बेटे ने 10वीं में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और डॉक्टर बनने का सपना देखा था, उसके साथ ऐसी घटना की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। एक तरफ बेटे की मौत का सदमा था तो दूसरी तरफ उसे बचाने की कोशिश में माता-पिता को भी खोने का दर्द। घटना के बाद परिवार और गांव में मातम पसरा हुआ है।
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इस घटना ने परिवार और बच्चों की बातचीत पर खड़ा किया सवाल
यह घटना इस बात पर भी सोचने को मजबूर करती है कि बच्चे किन परेशानियों से गुजर रहे हैं और क्या वे अपनी बात परिवार के सामने खुलकर रख पा रहे हैं। पढ़ाई, पैसे, मोबाइल या परिवार से जुड़े विवाद बच्चों पर कितना असर डाल सकते हैं, इसे समझना जरूरी है। अगर कोई बच्चा लगातार परेशान, गुस्से में या अकेला दिखाई दे, तो उसकी बात शांत होकर सुनना और जरूरत पड़ने पर किसी भरोसेमंद बड़े या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना बेहद जरूरी है।





















