भोपाल में सीलिंग के खिलाफ भड़के व्यापारी, अवधपुरी से गुलमोहर तक विरोध की लहर, अब रहवासी निकालेंगे टॉर्च मार्च

भोपाल में आवासीय इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों और नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। शनिवार को अवधपुरी में व्यापारियों ने नगर निगम की कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर रैली निकाली और अपनी दुकानें बंद रखीं। सुबह करीब 11:30 बजे शुरू हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल हुए। महिलाओं और बच्चों ने भी रैली में हिस्सा लिया। व्यापारियों का कहना है कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार के समय नगर निगम की ओर से सीलिंग और नोटिस की कार्रवाई करना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि कार्रवाई से छोटे और स्थानीय व्यापारियों को परेशानी हो रही है। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को बाग सेवनिया क्षेत्र में भी व्यापारियों ने नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
आवासीय इलाकों में कारोबार पर रहवासियों की भी नाराजगी
एक तरफ व्यापारी नगर निगम की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आवासीय क्षेत्रों में कमर्शियल गतिविधियों को लेकर रहवासी भी लंबे समय से सवाल उठा रहे हैं। रहवासियों का कहना है कि आवासीय भूखंडों पर बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुलने से आसपास रहने वाले लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनमें पार्किंग की समस्या, सड़क पर बढ़ता ट्रैफिक, शोर, प्रदूषण और सार्वजनिक सुविधाओं पर बढ़ता दबाव प्रमुख हैं। रहवासियों का तर्क है कि यदि किसी इलाके को आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित किया गया है तो वहां नियमों के खिलाफ बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां नहीं चलनी चाहिए।
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बैनर-पोस्टर लेकर सड़क पर निकली रैली
अवधपुरी में नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई को लेकर व्यापारियों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। शनिवार सुबह व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखकर बैनर-पोस्टर के साथ विरोध रैली निकाली। व्यापारियों का कहना है कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार के समय सीलिंग और नोटिस की कार्रवाई से कारोबार प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों ने भी हिस्सा लिया। व्यापारियों ने निगम से कार्रवाई पर पुनर्विचार करने और उन्हें राहत देने की मांग की।
निगम की कार्रवाई पर भी उठे सवाल
अरेरा कॉलोनी निवासी और इस मामले में याचिका लगाने वाले विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 1 अगस्त को निगम की ओर से कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी। उनके अनुसार, कई व्यावसायिक संस्थानों ने अपने प्रतिष्ठानों पर यह सूचना भी लगाई थी कि निगम के निर्देश के बाद उन्हें बंद किया गया है। लेकिन अब कुछ जगहों पर उन्हीं प्रतिष्ठानों के बाहर 'TO-LET' के बोर्ड दिखाई दे रहे हैं। रहवासियों का आरोप है कि इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या केवल मौजूदा दुकानदारों पर कार्रवाई हुई या फिर अवैध कमर्शियल गतिविधियों को पूरी तरह बंद किया गया। उनका कहना है कि अगर उन्हीं जगहों पर नए किराएदारों की तलाश जारी है तो कार्रवाई का स्थायी समाधान अभी नहीं हुआ है।
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नोटिस के बाद सीलिंग और ध्वस्तीकरण क्यों नहीं?
रहवासियों का सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की आगे की कार्रवाई को लेकर है। उनका कहना है कि यदि किसी निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि को नियमों के खिलाफ पाया गया है तो केवल नोटिस जारी करने के बजाय ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। रहवासियों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई 2026 को आवासीय परिसरों में किए जा रहे गैरकानूनी निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने और एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर निगम ने कई स्थानों पर अवैध निर्माण और गतिविधियों की पहचान कर कार्रवाई का दावा किया। अब रहवासी पूछ रहे हैं कि जब अवैध निर्माण चिन्हित किए जा चुके हैं, तो उनके खिलाफ सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ रही है?
'नोटिस का खेल बंद करो, अवैध निर्माण सील करो'
रहवासियों का कहना है कि लंबे समय तक सिर्फ नोटिस, सर्वे और कागजी कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका आरोप है कि कार्रवाई में देरी का फायदा अवैध निर्माण करने वालों और भूमाफिया को मिल सकता है। इसी वजह से अब रहवासियों के बीच 'नोटिस का खेल बंद करो, अवैध निर्माण सील करो' की मांग जोर पकड़ रही है। रहवासियों का कहना है कि प्रशासन और नगर निगम को नियमों का पालन कराते हुए स्पष्ट और समान कार्रवाई करनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि कार्रवाई किसी एक व्यक्ति या व्यापारी के खिलाफ नहीं, बल्कि नियमों के उल्लंघन के आधार पर होनी चाहिए।
आवासीय क्षेत्रों में कारोबार से क्या परेशानी?
रहवासियों के मुताबिक, आवासीय इलाकों में बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान शुरू होने से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। ग्राहकों के वाहनों की वजह से सड़कों पर पार्किंग का दबाव बढ़ता है। कई जगहों पर ट्रैफिक की समस्या पैदा होती है। इसके अलावा लगातार आने-जाने वाले लोगों की वजह से शोर और भीड़ बढ़ती है। रहवासियों का कहना है कि इससे बच्चों, बुजुर्गों और परिवारों की सामान्य दिनचर्या भी प्रभावित होती है। उनका सवाल है कि जब किसी क्षेत्र को आवासीय उपयोग के लिए तय किया गया है तो वहां नियमों के खिलाफ व्यावसायिक गतिविधियों को अनुमति कैसे मिल रही है।
शाम को निकलेगी टॉर्च लाइट रैली
अवधपुरी के प्रदर्शन के बाद अब आज शाम को गुलमोहर-त्रिलंगा क्षेत्र में भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के बैनर तले टॉर्च लाइट मार्च निकाला जाएगा। यह मार्च गुलमोहर स्थित सेवाएं मार्केट से शुरू होगा। इसमें बड़ी संख्या में रहवासियों के शामिल होने की उम्मीद है। रहवासियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यापारी का विरोध करना नहीं, बल्कि आवासीय क्षेत्रों में नियमों के मुताबिक व्यवस्था बनाए रखना है। वे चाहते हैं कि नगर निगम चिन्हित अवैध निर्माणों और कमर्शियल गतिविधियों पर स्पष्ट कार्रवाई करे।




















