नालसार के 2026 बैच पर बार काउंसिल का यू-टर्न, पहले रोक अब क्यों बदला फैसला?

नालसार यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को आमंत्रित करने के प्रस्ताव पर विवाद हुआ था। कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ईमेल के जरिए सीजेआई को आमंत्रित करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की थी। इस अभियान को लेकर बीसीआई ने कुलपति से तीन दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी थी और अभियान शुरू करने वालों की पहचान करने को कहा था। अब बीसीआई ने अपना पिछला आदेश वापस लेते हुए कहा है कि किसी छात्र की गलती नहीं होने पर उसे परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। काउंसिल ने यह भी कहा कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों द्वारा निर्दोष छात्रों को उकसाने की बात सामने आई है, जिसकी जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
BCI ने एनरोलमेंट रोकने का आदेश वापस लिया
बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने एक्स पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया का बयान शेयर करते हुए कहा कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ को लेकर पहले दिए गए निर्देशों में बदलाव किया गया है। इससे पहले उन्होंने सभी राज्यों की बार काउंसिल को निर्देश दिया था कि 2026 में नालसार से ग्रेजुएट हुए छात्रों का अगले आदेश तक अधिवक्ता के तौर पर एनरोलमेंट नहीं किया जाए। अब यह रोक वापस ले ली गई है। बीसीआई ने साफ किया कि मामले से जुड़े तथ्यों की जांच आगे भी जारी रहेगी।
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छात्रों के अभियान को लेकर मांगी गई थी रिपोर्ट
बीसीआई ने नालसार यूनिवर्सिटी से उन लोगों के बारे में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में बुलाने के प्रस्ताव का विरोध करने वाले अभियान में शामिल थे। बीसीआई अध्यक्ष ने कुलपति से तीन दिनों के भीतर प्रामाणिक रिपोर्ट देने को कहा था। इसमें उन व्यक्तियों की पहचान करने की बात भी कही गई थी, जिन्होंने अभियान शुरू किया था। काउंसिल अब कुलपति की जांच रिपोर्ट का इंतजार करेगी और उसके आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।
सीजेआई को बुलाने के प्रस्ताव पर हुआ था विवाद
पिछले सप्ताह नालसार लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने के प्रस्ताव को लेकर विवाद सामने आया था। जुलाई के दूसरे सप्ताह में यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और प्रोफेसरों को जानकारी मिली थी कि दीक्षांत समारोह जल्द आयोजित होगा और मुख्य न्यायाधीश ने इसमें शामिल होने की इच्छा जताई है। इसके बाद कुछ छात्रों ने कुलपति और रजिस्ट्रार को ईमेल भेजकर सीजेआई को आमंत्रित करने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। एक छात्र के मुताबिक, ईमेल की शुरुआत कानून के छात्रों ने की थी और बाद में अन्य विभागों के छात्रों ने भी अपनी आपत्तियां इसमें जोड़ीं।
निर्दोष छात्रों को परेशानी नहीं होगी
मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि तथ्यों की जांच जारी रहेगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र की कोई गलती नहीं होने पर उसे परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। बीसीआई ने अपने आदेश में कहा कि कुछ विश्वसनीय सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने निर्दोष छात्रों को उकसाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब काउंसिल कुलपति की रिपोर्ट का इंतजार करेगी और रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
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20 जुलाई को दिल्ली में हुआ था मार्च
बीबीसी तेलुगु की 10 अगस्त को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों के बीच यह अभियान दीक्षांत समारोह को लेकर सामने आया था। वहीं 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आह्वान पर युवाओं और छात्रों ने दिल्ली में संसद की ओर मार्च भी किया था। नालसार के छात्रों द्वारा भेजे गए ईमेल में सीजेआई सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई गई थी। पूरे मामले में अब बीसीआई की नजर कुलपति की जांच रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।












