MP में तबादला नीति 2026 लागू:आज शुरू हुआ ट्रांसफर का दौर, सभी विभागों में हलचल तेज

भोपाल। प्रदेश में सरकारी सिस्टम में एक बार फिर बड़े बदलाव देखने को मिलेगा। 1 जून से 15 जून तक सभी विभागों में तबादलों का दौर शुरू हो गया है। इस दौरान अधिकारी और कर्मचारियों के स्वैच्छिक और प्रशासनिक दोनों आधार पर ट्रांसफर किए जाएंगे। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार प्रक्रिया तय नियमों और नए ढांचे के हिसाब से होगी। यह बदलाव सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की नई तबादला नीति 2026 के तहत हो रहा है, जिसे हाल ही में कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
तबादला नीति 2026 क्या है?
सरकार ने 20 मई को हुई कैबिनेट बैठक में नई तबादला नीति को मंजूरी दी थी। इसके बाद 22 मई को सामान्य प्रशासन विभाग ने इसे आधिकारिक रूप से जारी कर दिया। इस नीति के तहत सभी विभागों को 9 दिनों का समय दिया गया है ताकि वे अपनी तैयारियां पूरी कर सकें और अपने स्तर पर ट्रांसफर से जुड़ी विभागीय नीति बना सकें। अब 1 जून से लेकर 15 जून तक सभी विभाग अपने-अपने कर्मचारियों के तबादले कर सकेंगे।
यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट में नए जज नियुक्त... नई ज्यूडिशियल टीम तैयार, आखिर कौन हैं ये 5 चेहरे?
पुलिस विभाग में पहले ही शुरू हुआ बदलाव
प्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने आरक्षक से लेकर सब-इंस्पेक्टर (SI) तक के तबादलों के लिए 5 जून तक का समय तय किया है। जिससे जिलों में एसपी और पुलिस कमिश्नर स्तर पर तबादलों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कई जिलों में पुलिस व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक संतुलन और फील्ड पर बेहतर कामकाज सुनिश्चित करना बताया जा रहा है
अन्य विभागों में भी तैयारी तेज
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से अधिकारियों और कर्मचारियों का पूरा डेटा मांगा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने संविदा कर्मचारियों से 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। कई अन्य विभाग भी अपने स्तर पर सूची तैयार कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें: इंदौर की गैंगवार भिंड पहुंची: हत्याकांड की रंजिश में ताबड़तोड़ फायरिंग,कार पर बरसाईं गोलियां
कितने प्रतिशत होंगे ट्रांसफर?
नई नीति में कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तबादलों की सीमा तय की गई है-
- जिन विभागों में 200 तक कर्मचारी हैं- 20% तक तबादले
- 200 से 1000 कर्मचारी वाले विभाग- 15% तबादले
- 1000 से 2000 कर्मचारी वाले विभाग- 10% तबादले
- 2000 से ज्यादा कर्मचारी वाले विभाग- केवल 5% तबादले
यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि प्रशासनिक स्थिरता बनी रहे और जरूरत के अनुसार ही बदलाव हो।
किन मामलों में तबादला नीति लागू नहीं होगी?
कुछ विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों को नीति से छूट दी गई है। पति-पत्नी को एक ही स्थान पर रखने के मामले, गंभीर बीमारी से ग्रस्त कर्मचारियों के तबादले और चिकित्सा और पारिवारिक जरूरत वाले केस। इन मामलों में मानवता और सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी।
तीन साल का नियम और प्रदर्शन आधारित ट्रांसफर
नई नीति में एक बड़ा बदलाव यह है कि:
प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारी यदि एक जिले में 3 साल पूरे कर लेते हैं तो उनका तबादला किया जा सकता है। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों पर भी यही नियम लागू होगा, लेकिन सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 3 साल पूरा होना अनिवार्य शर्त नहीं है। अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने तय लक्ष्य (targets) पूरे नहीं करता है, तो उसे समय से पहले भी बदला जा सकता है।
रिक्त पदों को भरने में सावधानी
सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि रिक्त पदों को भरने के लिए एक के बाद एक तबादले (chain transfer) नहीं किए जाएंगे। इसका मतलब यह है कि एक खाली पद भरने के लिए कई कर्मचारियों को इधर-उधर नहीं किया जाएगा। सिर्फ जरूरत और नियम के अनुसार ही तबादले होंगे।
महिलाओं और वरिष्ठ कर्मचारियों को राहत
नई नीति में सामाजिक संवेदनशीलता का ध्यान रखा गया है। अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को उनके गृह जिले में पोस्टिंग दी जा सकती है। जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में 1 साल या उससे कम समय बचा है, उनका सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा।
यह भी पढ़ें: MP School Education : सिलेक्टेड टीचर्स की नियुक्ति के बजाय सरकार को अतिथि शिक्षकों पर भरोसा
प्रशासनिक और न्यायिक आधार पर भी होंगे तबादले
कुछ खास परिस्थितियों में सामान्य नियमों से हटकर भी तबादले किए जा सकते हैं। कोर्ट के आदेश पर, गंभीर शिकायतों के मामलों में, पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने पर और प्रतिनियुक्ति से वापसी होने पर में तबादले किए जा सकते है।
कैबिनेट में मिली मंजूरी
प्रदेश की इस नई तबादला नीति 2026 को हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई। 20 मई को हुई इस बैठक में नीति को अंतिम रूप दिया गया, जिसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 22 मई को इसे आधिकारिक रूप से जारी किया। कैबिनेट ने स्पष्ट किया कि यह नीति प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तेज और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से लाई गई है। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तय समय सीमा के भीतर ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी करें और नियमों का सख्ती से पालन करें।











