सुप्रीम कोर्ट में नए जज नियुक्त...नई ज्यूडिशियल टीम तैयार, आखिर कौन हैं ये 5 चेहरे?

देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। केंद्र सरकार ने पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह नियुक्तियां औपचारिक रूप से लागू हो गई हैं। यह फैसला न्यायपालिका के भविष्य और कार्यप्रणाली दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नियुक्त हुए पांच नए न्यायाधीश
सुप्रीम कोर्ट में जिन पांच लोगों को जज नियुक्त किया गया है, वे हैं-
- जस्टिस शील नागू
- जस्टिस श्री चंद्रशेखर
- जस्टिस संजीव सचदेवा
- जस्टिस अरुण पल्ली
- वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहन
इन सभी नामों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की थी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने मंजूरी दी और राष्ट्रपति ने अंतिम मुहर लगाई।
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कौन हैं ये नए न्यायाधीश?
जस्टिस शील नागू
शील नागू पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। उनका जन्म 1 जनवरी 1965 को हुआ था। उन्होंने 1987 में वकालत शुरू की और शुरुआत में सिविल, संवैधानिक और सेवा संबंधी मामलों पर काम किया। 2011 में उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया और 2013 में वे स्थायी जज बने। बाद में वे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी रहे। 2024 में उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। अपने करियर में उन्होंने पर्यावरण, निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मामलों में महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं।

जस्टिस श्री चंद्रशेखर
श्री चंद्रशेखर का जन्म 25 मई 1965 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई की और 1993 में वकालत शुरू की। लगभग दो दशक तक उन्होंने वकालत की और 2013 में झारखंड हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज बने। 2014 में वे स्थायी जज बने और बाद में राजस्थान हाईकोर्ट और फिर बॉम्बे हाईकोर्ट में भी सेवा दी। 2025 में वे बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। उन्होंने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस और मालेगांव ब्लास्ट जैसे बड़े मामलों की सुनवाई में भूमिका निभाई है।
जस्टिस संजीव सचदेवा
संजीव सचदेवा का जन्म 26 दिसंबर 1964 को हुआ था। उन्होंने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स और दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ सेंटर से पढ़ाई की। 1995 में वे सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड बने और 2011 में सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला। 2013 में वे दिल्ली हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज बने और 2015 में स्थायी जज बने। 2024 में उनका ट्रांसफर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हुआ और 2025 में वे वहां के मुख्य न्यायाधीश बने। उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए भी काम किया है और न्यायिक सिस्टम को बेहतर बनाने पर फोकस किया है।

जस्टिस अरुण पल्ली
अरुण पल्ली का जन्म 18 सितंबर 1964 को पटियाला में हुआ था। उन्होंने 1988 में पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में लंबे समय तक वकालत की और 2004 से 2007 तक पंजाब के एडिशनल एडवोकेट जनरल रहे। 2013 में वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने और 2025 में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। उन्होंने लोक अदालत और मध्यस्थता जैसे सिस्टम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

वी. मोहन (वरिष्ठ अधिवक्ता)
वी. मोहन का जन्म 27 जून 1966 को कोयंबटूर में हुआ था। उन्होंने 1988 में कोयंबटूर लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। 1996 में वे एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड बनीं और 2015 में सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला। वे सीधे वकालत से सुप्रीम कोर्ट जज बनी हैं, जो बेहद दुर्लभ माना जाता है। वे देश की दूसरी महिला हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है और सुप्रीम कोर्ट की 12वीं महिला जज भी बनी हैं। उन्होंने महिला सेना अधिकारियों के स्थायी कमीशन, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार और हिजाब विवाद जैसे अहम मामलों में पैरवी की है। उनका कार्यकाल करीब पांच साल का रहेगा।

कॉलेजियम सिस्टम क्या है?
भारत में जजों की नियुक्ति एक खास प्रक्रिया से होती है, जिसे कॉलेजियम सिस्टम कहा जाता है। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज शामिल होते है। यह सिस्टम तय करता है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कौन जज बनेगा और किसे पदोन्नति मिलेगी।
कैसे होती है नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया?
यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नामों की सिफारिश करते हैं। फिर राज्य सरकार और राज्यपाल से होकर फाइल केंद्र तक जाती है। केंद्रीय कानून मंत्रालय इसे आगे बढ़ाता है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अंतिम निर्णय लेता है। राष्ट्रपति नियुक्ति पर हस्ताक्षर करते हैं। फिर आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी होता है। यह पूरी प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंत्रता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए बनाई गई है।
क्यों खास है यह नियुक्ति?
यह सिर्फ पद भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि न्याय व्यवस्था में एक बड़ा स्ट्रक्चरल अपडेट है। अनुभव से भरे जज सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। हाईकोर्ट के प्रमुख न्यायाधीशों को पदोन्नति मिली है। एक वरिष्ठ महिला वकील सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं। न्यायिक विविधता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व मजबूत हुआ है।
वी. मोहन की नियुक्ति क्यों चर्चा में है?
वी. मोहन की एंट्री खास इसलिए मानी जा रही है क्योंकि वे सीधे वकालत से सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं, वे दूसरी महिला हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है।उनका कार्यकाल लंबा रहेगा। उन्होंने कई बड़े संवैधानिक मामलों में पैरवी की है।











