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एमपी के शिक्षकों को बड़ी राहत:जनगणना और चुनाव ड्यूटी पर मिलेगा अर्जित अवकाश, ई-अटेंडेंस रहेगी जरूरी

मध्य प्रदेश सरकार ने जनगणना और चुनाव जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगे शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। अब ऐसे शिक्षकों को अर्न लीव (अर्जित अवकाश) का लाभ दिया जाएगा। लांकि इसके लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य होगी।
जनगणना और चुनाव ड्यूटी पर मिलेगा अर्जित अवकाश, ई-अटेंडेंस रहेगी जरूरी
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मध्य प्रदेश सरकार ने जनगणना और चुनाव जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगे शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। अब ऐसे शिक्षकों को अर्न लीव (अर्जित अवकाश) का लाभ दिया जाएगा। यह फैसला एक मई से शुरू हुई जनगणना प्रक्रिया के बीच लिया गया है जिससे हजारों शिक्षकों को सीधा फायदा मिलेगा। राज्य सरकार ने यह निर्णय दिल्ली सरकार की तर्ज पर लिया है जहां पहले से ही शिक्षकों को इस तरह की ड्यूटी के बदले अर्जित अवकाश की सुविधा दी जा रही है।

ई-अटेंडेंस रहेगी जरूरी

लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त द्वारा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि जो शिक्षक जनगणना या चुनाव ड्यूटी में लगाए जाएंगे उन्हें ड्यूटी स्थल पर ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसके लिए ‘हमारे शिक्षक’ एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करानी होगी। ई-अटेंडेंस लगाने वाले शिक्षकों को ही अर्जित अवकाश संचित करने का लाभ मिलेगा।

विश्राम अवधि में ड्यूटी पर बुलाने पर मिलेगा लाभ

निर्देशों के अनुसार यदि शिक्षकों को उनकी विश्राम अवधि (छुट्टियों) के दौरान जनगणना, निर्वाचन या अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए बुलाया जाता है तो उन्हें इसके बदले अर्जित अवकाश दिया जाएगा। सरकार का यह कदम उन शिक्षकों के लिए राहत भरा माना जा रहा है जिन्हें लंबे समय से छुट्टियों में भी ड्यूटी करनी पड़ती थी लेकिन बदले में पर्याप्त अवकाश नहीं मिल पाता था।

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शिक्षक संगठनों की मांग के बाद लिया गया फैसला

यह निर्णय शिक्षक संगठनों की लगातार मांग के बाद लिया गया है। एक मई से शुरू हुई जनगणना में शिक्षकों को ड्यूटी पर लगाया गया जबकि स्कूल शिक्षा विभाग के कैलेंडर के अनुसार इस अवधि में उन्हें अवकाश मिलना था। इस स्थिति को देखते हुए शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की थी कि दिल्ली की तरह मध्यप्रदेश में भी शिक्षकों को अर्जित अवकाश का लाभ दिया जाए।

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शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बढ़ता बोझ

शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षकों से लगातार चुनाव, सर्वेक्षण और जनगणना जैसे गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जाते हैं लेकिन इसके बदले उन्हें न तो पर्याप्त अवकाश मिलता है और न ही उचित सम्मान। ऐसे में यह फैसला शिक्षकों के अधिकारों और उनके कार्य के सम्मान को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के इस निर्णय से अब जनगणना और चुनाव ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को राहत मिलेगी और उन्हें अपने अतिरिक्त कार्य के बदले उचित अवकाश का लाभ मिल सकेगा।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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