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जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू!घर-घर पहुंचेगी टीम, MP में 30 दिन का डिजिटल सर्वे, 1.70 लाख कर्मचारी मैदान में

मध्य प्रदेश में जनगणना-2027 के पहले चरण की शुरुआत हो गई है, जिसमें 1.70 लाख से अधिक कर्मचारी घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है और करीब 30 से 45 दिनों तक चलेगी। मकानों और परिवारों की जानकारी जुटाई जा रही है, लाखों लोगों ने पहले ही स्वगणना में हिस्सा लिया है।
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घर-घर पहुंचेगी टीम, MP में 30 दिन का डिजिटल सर्वे, 1.70 लाख कर्मचारी मैदान में
MP CENSUS

मध्यप्रदेश। जनगणना-2027 के पहले चरण की शुरुआत हो चुकी है। 1 मई से प्रदेशभर में सरकारी कर्मचारी और प्रगणक घर-घर जाकर लोगों से जानकारी एकत्र कर रहे हैं। यह प्रक्रिया करीब 30 से 45 दिनों तक चलेगी, जिसमें मकानों और परिवारों का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। इस बार की जनगणना को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है, जिससे डेटा को तेजी से और सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जा सके।

हर घर का होगा सर्वे

इस बड़े अभियान के लिए प्रदेश में करीब 1.70 लाख से 2 लाख कर्मचारियों को तैनात किया गया है। ये सभी कर्मचारी अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लगभग 200-200 मकानों का सर्वे करेंगे। जनगणना निदेशालय ने इसके लिए पूरे प्रदेश को ब्लॉक्स में बांटा है, जहां हर ब्लॉक में 180 से 200 मकान शामिल किए गए हैं। इस दौरान शहरों और गांवों दोनों जगह समान रूप से डेटा एकत्र किया जाएगा।

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डिजिटल तकनीक से होगी जनगणना

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जा रही है। प्रगणक मोबाइल ऐप और टैबलेट जैसे उपकरणों का उपयोग करके सीधे जानकारी दर्ज कर रहे हैं। इससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी बल्कि डेटा की सटीकता भी बढ़ेगी। प्रशासन ने सभी कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया है ताकि किसी तरह की गलती न हो।

CM

लाखों परिवारों ने लिया हिस्सा

जनगणना से पहले लोगों को स्वगणना यानी सेल्फ इनुमेरेशन की सुविधा भी दी गई थी। इस दौरान प्रदेश के लाखों परिवारों ने ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी खुद दर्ज की। यह सुविधा 14 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध थी, जिससे लोगों को आसानी हुई। बताया जा रहा है कि लाखों परिवारों ने इस डिजिटल प्रक्रिया में भाग लिया।

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घर-घर पूछे जा रहे 30 से अधिक सवाल

जनगणना के दौरान कर्मचारियों द्वारा परिवारों से लगभग 30 से 33 सरल सवाल पूछे जा रहे हैं। इनमें मकान का उपयोग, परिवार की सामान्य जानकारी और अन्य बुनियादी विवरण शामिल हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि इस दौरान किसी भी व्यक्ति से कोई दस्तावेज, ओटीपी या शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया केवल सांख्यिकीय डेटा के लिए है।

जनगणना में सुरक्षा और गोपनीयता का खास ध्यान

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना में एकत्र किया गया सभी डेटा पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेगा। इसे केवल सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग नहीं होगा। इस प्रक्रिया को इंक्रिप्टेड सिस्टम के जरिए सुरक्षित रखा गया है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग व्यवस्था

ग्रामीण क्षेत्रों में जनगणना को सुचारू रूप से चलाने के लिए मुनादी और स्थानीय व्यवस्था का सहारा लिया जा रहा है। वहीं शहरों में सोसाइटी और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की मदद से प्रगणकों को प्रवेश सुनिश्चित किया जा रहा है। इससे हर घर तक पहुंच बनाना आसान हो गया है।

फ्रॉड से सावधान रहने की अपील

प्रशासन ने लोगों को चेतावनी दी है कि जनगणना के नाम पर किसी भी तरह की धोखाधड़ी हो सकती है। इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। असली प्रगणक के पास सरकारी पहचान पत्र और क्यूआर कोड होता है, जिसे स्कैन कर उनकी पहचान की जा सकती है। किसी भी व्यक्ति से ओटीपी या बैंक जानकारी नहीं मांगी जाएगी।

बड़े शहर और ग्रामीण क्षेत्र

स्वगणना के आंकड़ों के अनुसार, कुछ जिलों में लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया, जबकि बड़े शहरों में अपेक्षाकृत कम उत्साह देखा गया। ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रक्रिया को अधिक गंभीरता से लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि आगे चलकर यह डेटा प्रदेश की विकास योजनाओं को मजबूत आधार देगा।

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Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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