पराली जलाने में एमपी नंबर-1 :21 दिन में 20 हजार से ज्यादा मामले, देश में 69% हिस्सेदारी

मध्य प्रदेश में गेहूं की कटाई के बाद पराली जलाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक राज्य इस मामले में पूरे देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
21 दिन में 20 हजार से ज्यादा मामले, देश में 69% हिस्सेदारी

मध्य प्रदेश में गेहूं की कटाई के बाद पराली जलाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक राज्य इस मामले में पूरे देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। ICAR और CREAMS के डेटा के अनुसार 1 से 21 अप्रैल के बीच देशभर में दर्ज 29,167 मामलों में से करीब 20,164 घटनाएं अकेले मध्य प्रदेश में हुई हैं। यानी कुल मामलों में लगभग 69% हिस्सेदारी एमपी की है।

तीन हफ्तों में ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा आंकड़ा

सिर्फ 21 दिनों के भीतर इतने बड़े स्तर पर पराली जलाने की घटनाएं सामने आना चिंता का विषय बन गया है। हालांकि पिछले साल इसी अवधि में 20,422 मामले दर्ज हुए थे लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार यह आंकड़ा पूरे सीजन में पुराने रिकॉर्ड को पार कर सकता है।

विदिशा और उज्जैन सबसे आगे

जिला स्तर पर देखें तो विदिशा और उज्जैन में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। खास बात यह है कि विदिशा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र भी है जहां इस समस्या की गंभीरता और ज्यादा चर्चा में है।

अन्य राज्यों से कई गुना ज्यादा मामले

मध्य प्रदेश के मुकाबले बाकी राज्यों में यह आंकड़ा काफी कम है।

  • उत्तर प्रदेश में 8,889 मामले दर्ज हुए
  • हरियाणा में 65 घटनाएं
  • पंजाब में केवल 44 मामले

यह अंतर दिखाता है कि पराली जलाने की समस्या इस समय सबसे ज्यादा एमपी में ही गंभीर बनी हुई है।

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बैन के बावजूद जारी है पराली जलाना

देशभर में फसल अवशेष जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके बावजूद किसान बड़े पैमाने पर पराली जला रहे हैं। नियमों के तहत ऐसा करने पर 2,500 रुपए से लेकर 15,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई और सजा का भी प्रावधान है।

क्यों बढ़ रही है समस्या

विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों के पास पराली के निपटान के पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण वे इसे जलाने को मजबूर होते हैं। समय की कमी, लागत और मशीनों की उपलब्धता भी इसके पीछे बड़ी वजह मानी जा रही है।

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पर्यावरण और स्वास्थ्य पर सीधा असर

पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को तेजी से बढ़ाता है। इसका असर न सिर्फ आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता पर पड़ता है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी सीधा प्रभाव डालता है। सांस से जुड़ी बीमारियों और आंखों में जलन जैसी समस्याएं इस दौरान बढ़ जाती हैं।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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