सीहोर जनपद की बैठक पर सियासी संग्राम, सुरेंद्र मेवाड़ा पर मुकदमे की कांग्रेस ने उठाई मांग; पूछा-नियमों का क्या हुआ?

सीहोर। सीहोर जनपद पंचायत में 17 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम को लेकर अब राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। जिला कांग्रेस प्रवक्ता पंकज शर्मा ने आरोप लगाया है कि जनपद पंचायत की महत्वपूर्ण बैठक में चुने हुए जनप्रतिनिधि नहीं होने के बावजूद भाजपा नेता एवं जिला पंचायत प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह मेवाड़ा ने बैठक की अध्यक्षता की। कांग्रेस ने इसे पंचायत के नियमों और महिला सशक्तिकरण की अवधारणा से जोड़ते हुए प्रशासन से उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। वहीं भाजपा जिला मीडिया प्रभारी प्रीतेश राठौर ने पूरे आरोप को खारिज करते हुए कहा कि वहां जल जीवन मिशन की कार्यशाला थी, किसी आधिकारिक बैठक की अध्यक्षता नहीं की गई।
कांग्रेस का दावा- एजेंडे में प्रतिनिधियों की मनाही थी
पंकज शर्मा के मुताबिक 17 सितंबर को जनपद पंचायत सीहोर में 16वें वित्त से संबंधित कार्यों को लेकर बैठक आयोजित की गई थी। इसी दौरान जल जीवन मिशन से संबंधित प्रशिक्षण/कार्यशाला भी रखी गई थी। कांग्रेस का दावा है कि बैठक के एजेंडे में स्पष्ट था कि इसमें केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही शामिल होंगे और किसी सदस्य के प्रतिनिधि को बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी। इसके बावजूद कुछ जनपद सदस्यों के पति कार्यक्रम में मौजूद रहे।
सुरेंद्र मेवाड़ा पर अध्यक्षता करने का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह मेवाड़ा ने जनपद पंचायत की बैठक की अध्यक्षता की, जबकि वे निर्वाचित जनपद प्रतिनिधि नहीं हैं। पंकज शर्मा ने इसे सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी बताते हुए सवाल उठाया कि यदि बैठक में केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल होना था तो एक गैर-निर्वाचित व्यक्ति को अध्यक्षता की अनुमति कैसे मिली।
महिला सशक्तिकरण पर कांग्रेस ने साधा निशाना
इस पूरे मामले को कांग्रेस ने भाजपा की महिला सशक्तिकरण की नीति से जोड़कर राजनीतिक हमला तेज कर दिया है। पंकज शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा की नारी सशक्तिकरण की बात जमीनी स्तर पर कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है और निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति या परिवार के पुरुष सदस्य निर्णय लेते नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि जनपद पंचायत का यह मामला इसी राजनीतिक बहस को और तीखा करता है।
‘अधिकारी और सदस्य क्यों नहीं रोक पाए?’
कांग्रेस ने कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और जनपद सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। पंकज शर्मा का कहना है कि यदि सुरेंद्र मेवाड़ा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे और वे निर्वाचित सदस्य नहीं थे, तो अधिकारियों अथवा निर्वाचित सदस्यों को उसी समय आपत्ति दर्ज करनी चाहिए थी। कांग्रेस ने इसे प्रशासनिक व्यवस्था और पंचायत के नियमों से जुड़ा गंभीर सवाल बताया है।
भाजपा ने कहा- कांग्रेस जबरन मुद्दा बना रही
भाजपा जिला मीडिया प्रभारी प्रीतेश राठौर ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उनका कहना है कि कार्यक्रम मूल रूप से जल जीवन मिशन की कार्यशाला से संबंधित था। उनके अनुसार सुरेंद्र मेवाड़ा ने किसी आधिकारिक जनपद पंचायत बैठक की अध्यक्षता नहीं की। भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीतिक मुद्दा खड़ा करने का आरोप लगाया है।
मेवाड़ा का स्पष्टीकरण- बैठक में नहीं, कार्यशाला में था
विवाद बढ़ने के बाद सुरेंद्र मेवाड़ा ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वे किसी आधिकारिक जनपद पंचायत बैठक में शामिल नहीं हुए थे, बल्कि जल जीवन मिशन की कार्यशाला में उपस्थित थे। उनके अनुसार कार्यशाला में ग्रामीणों को भी अपनी समस्याएं और सुझाव रखने के लिए आमंत्रित किया गया था।
‘आधिकारिक बैठक आधे घंटे बाद हुई’
मेवाड़ा ने दावा किया कि जनपद सदस्यों की आधिकारिक बैठक कार्यशाला समाप्त होने के करीब आधे घंटे बाद आयोजित हुई और उसका उनसे कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कार्यक्रम की तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि कार्यशाला की व्यवस्था और आधिकारिक जनपद बैठक की व्यवस्था अलग थी। उनका कहना है कि कांग्रेस ने दोनों कार्यक्रमों को एक मानकर आरोप लगाए हैं।
अब प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें
मामले में कांग्रेस ने जिला प्रशासन से सुरेंद्र मेवाड़ा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है और कार्रवाई नहीं होने पर उच्च स्तर पर शिकायत की चेतावनी दी है। दूसरी ओर भाजपा और मेवाड़ा का कहना है कि आधिकारिक बैठक की अध्यक्षता का आरोप ही गलत है। ऐसे में विवाद का केंद्र अब यह सवाल बन गया है कि 17 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम की वास्तविक प्रकृति क्या थी और उसमें कौन-कौन आधिकारिक रूप से शामिल था।



















