एप्को रिपोर्ट में खुलासा:तवा वेटलैंड का पानी पीने योग्य, भोपाल के छोटा तालाब और इंदौर के सिरपुर की गुणवत्ता सबसे खराब

संतोष चौधरी, भोपाल। एप्को ने प्रदेश के भोज वेटलैंड, लोअर लेक, सिरपुर वेटलैंड, यशवंत सागर, सांख्य सागर और तवा वेटलैंड के पानी की गुणवत्ता का परीक्षण किया। जांच में पीएच स्तर, टीडीएस, बीओडी, सीओडी और सूक्ष्म जीवों समेत कई पहलुओं का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट में कई वेटलैंड्स में सीवेज, ठोस कचरा और मानव गतिविधियों के कारण जल गुणवत्ता प्रभावित होने की बात सामने आई है। विशेषज्ञों ने जलाशयों को बचाने के लिए सीवेज नियंत्रण और जैविक खेती को बढ़ावा देने की सलाह दी है।
तवा वेटलैंड का पानी सबसे बेहतर श्रेणी में
नर्मदापुरम स्थित तवा वेटलैंड की जांच रिपोर्ट सबसे सकारात्मक रही है। यहां मनकामनेश्वर मंदिर, आउटलेट और बोट क्लब के पास से लिए गए पानी के सैंपल्स ए कैटेगरी में पाए गए। रिपोर्ट में बताया गया कि यहां जल प्रदूषण नहीं मिला और पानी सामान्य रूप से स्वच्छ है। तवा का पानी सीधे पीने योग्य पाया गया है। विशेषज्ञों ने इसे प्रदेश के सबसे बेहतर वेटलैंड्स में शामिल बताया है। रिपोर्ट में कहा गया कि यहां जैव विविधता और जल गुणवत्ता दोनों संतुलित स्थिति में हैं।
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भोपाल की भोज वेटलैंड और लोअर लेक में बढ़ा प्रदूषण
भोपाल की भोज वेटलैंड यानी बड़े तालाब के अलग-अलग हिस्सों में पानी की गुणवत्ता बी और सी श्रेणी में पाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक कोलांस नदी और वन विहार क्षेत्र का पानी बेहतर स्थिति में है, जबकि खानूगांव, कमला पार्क और भदभदा क्षेत्र में सीवेज और ठोस कचरे का असर दिखाई दिया। वहीं लोअर लेक के बाणगंगा इनलेट, भोईपुरा और खटलापुरा जैसे क्षेत्रों से लिए गए नमूने डी श्रेणी के पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि ज्यादा मानव हस्तक्षेप और सीवेज के कारण यहां का पानी काफी प्रभावित हो चुका है। विशेषज्ञों ने इसे खतरे की घंटी बताया है।
इंदौर और शिवपुरी के वेटलैंड्स पर भी दबाव
इंदौर की सिरपुर वेटलैंड और शिवपुरी के सांख्य सागर में भी जल गुणवत्ता पर दबाव बढ़ता दिखाई दिया। सिरपुर वेटलैंड के अपर लेक में पानी सी श्रेणी का पाया गया, जबकि लोअर लेक में कुछ स्थानों पर पानी डी श्रेणी में दर्ज हुआ। रिपोर्ट में पर्यटन गतिविधियों, वाहन धुलाई, औद्योगिक अपशिष्ट और कृषि क्षेत्रों से आने वाले केमिकल को प्रदूषण का बड़ा कारण बताया गया। वहीं सांख्य सागर में कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक जलीय खरपतवार और सीवेज का असर मिला, हालांकि कुछ हिस्सों में पानी अपेक्षाकृत साफ पाया गया। पुल के पास स्थित धारा क्षेत्र का पानी सबसे बेहतर श्रेणी में दर्ज किया गया।
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विशेषज्ञों ने दिए संरक्षण और सुधार के सुझाव
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सीवेज के पानी को ट्रीटमेंट के बाद ही जलाशयों में छोड़ा जाए। वेटलैंड्स के आसपास जैविक खेती को बढ़ावा देने और पशुओं के प्रवेश को रोकने की सलाह दी गई है। इसके अलावा नहाने, कपड़े धोने और कचरा फेंकने जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण जरूरी बताया गया है। एप्को के प्रभारी डॉ. सुब्रत पाणी ने बताया कि तवा का पानी सबसे साफ और सीधे पीने योग्य पाया गया है। वहीं पर्यावरणविद् सुभाष सी पांडेय ने चेतावनी दी कि भोपाल की लोअर लेक का प्रदूषित पानी आसपास के भूजल स्रोतों को भी प्रभावित कर सकता है।












