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गर्मी ने बदली मढ़ई की तस्वीर :पानी घटते ही बंद हुई बोट सफारी, पैदल पहुंच रहे सैलानी

जलस्तर घटने के चलते मढ़ई की बोट सफारी भी बंद कर दी गई है। इससे वन विभाग और पर्यटन प्रबंधन को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।दूसरी ओर, पर्यटक भी बोट सफारी के रोमांचक अनुभव से वंचित हो रहे हैं।
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पानी घटते ही बंद हुई बोट सफारी, पैदल पहुंच रहे सैलानी

सोहागपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मढ़ई में गर्मी अब अपने चरम पर पहुंच गई है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण तवा-देनवा बैकवॉटर का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। इसका असर पर्यटन गतिविधियों पर साफ दिखाई दे रहा है। पानी कम होने के कारण अब पर्यटकों को जेटी के सहारे पैदल चलकर मढ़ई पहुंचना पड़ रहा है। पहले जहां पर्यटक बोट के जरिए मढ़ई पहुंचते थे, वहीं अब यह सुविधा पूरी तरह बंद हो चुकी है।

बोट सफारी बंद, पर्यटकों और प्रबंधन दोनों को नुकसान

जलस्तर घटने के चलते मढ़ई की बोट सफारी भी बंद कर दी गई है। इससे वन विभाग और पर्यटन प्रबंधन को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।दूसरी ओर, पर्यटक भी बोट सफारी के रोमांचक अनुभव से वंचित हो रहे हैं। मढ़ई आने वाले लोग खासतौर पर बैकवॉटर के सुंदर नजारे और जंगल के बीच बोटिंग का आनंद लेने पहुंचते हैं, लेकिन फिलहाल यह आकर्षण खत्म हो गया है।

पानी घटने से बढ़ी वन्यजीवों की चिंता

बैकवॉटर का पानी उतरने का असर वन्यजीव क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। बफर क्षेत्र से लगे गांवों के पालतू पशु अब आसानी से कोर एरिया की तरफ पहुंच रहे हैं। इससे बाघ और अन्य मांसाहारी वन्यजीव मानव बस्तियों और पालतू जानवरों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है।

हालांकि, मढ़ई रेंजर राहुल उपाध्याय और बागरा बफर के परिक्षेत्र अधिकारी विलास डोंगरे का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ा दी गई है।

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जंगल में पानी पहुंचाने की व्यवस्था

सहायक संचालक आशीष खोबरागड़े के मुताबिक, गर्मी और सूखे की स्थिति को देखते हुए जंगल के सूखाग्रस्त हिस्सों में वन्यजीवों के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। जंगल के अंदर बने पोखरों और कृत्रिम जल स्रोतों तक टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है, ताकि वन्यजीवों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।

जंगल के अंदर चले गए वन्यजीव

गर्मी बढ़ने के साथ हिरण, चीतल और सांभर जैसे शाकाहारी वन्यजीव जंगल के अंदरूनी और ठंडे इलाकों की तरफ चले गए हैं। इससे पर्यटकों को दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन कम हो रहे हैं।

हालांकि, वन अधिकारियों के अनुसार शाम के समय कभी-कभार शाकाहारी वन्यजीवों के दीदार हो जाते हैं। फिलहाल मढ़ई में आने वाले पर्यटक बोट सफारी और वन्यजीवों के रोमांचक नजारों को काफी मिस कर रहे हैं।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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