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Peoples Update Special :20 साल के इंतजार के बाद मिली पदोन्नति, 12 दिन में ही रद्द हुआ आदेश; प्यून और चौकीदार फिर पुराने पद पर लौटे

मध्यप्रदेश के उद्योग संचालनालय में करीब दो दशक के लंबे इंतजार के बाद प्यून और चौकीदारों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति मिली, लेकिन उनकी खुशी महज 12 दिन ही टिक सकी। विभाग ने पदोन्नति आदेश वापस लेते हुए सभी कर्मचारियों को फिर पुराने पद पर भेज दिया। अचानक हुए इस फैसले से कर्मचारी और उनके परिवार गहरे सदमे में हैं।
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20 साल के इंतजार के बाद मिली पदोन्नति, 12 दिन में ही रद्द हुआ आदेश; प्यून और चौकीदार फिर पुराने पद पर लौटे
20 साल के इंतजार के बाद मिली पदोन्नति, 12 दिन में ही रद्द हुआ आदेश

विजय एस. गौर, भोपाल। 5 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश के बाद कर्मचारियों के घरों में खुशियां मनाई गईं, लेकिन 17 जुलाई को विभाग ने आदेश वापस ले लिया। विभाग का कहना है कि सीपीसीटी और एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा अनिवार्य होने के कारण पदोन्नति निरस्त की गई। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक योग्यता पूरी करने के बाद भविष्य में इन कर्मचारियों पर फिर विचार किया जा सकता है।

20 साल बाद मिली खुशी, 12 दिन में छिन गई

प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने के बाद उद्योग संचालनालय ने विभिन्न कार्यालयों में पदस्थ 14 प्यून और चौकीदारों को वरिष्ठता के आधार पर सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति देने के आदेश 5 जुलाई 2026 को जारी किए थे। पदोन्नति की खबर मिलते ही कर्मचारियों और उनके परिवारों में खुशी का माहौल बन गया। कई जगह मिठाइयां बांटी गईं, मंदिरों में प्रसाद चढ़ाया गया और परिवारों ने जश्न भी मनाया। लेकिन यह खुशी केवल 12 दिन ही रह सकी।

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17 जुलाई को विभाग ने वापस ले लिया आदेश

17 जुलाई को उद्योग संचालनालय ने अचानक पदोन्नति संबंधी आदेश वापस ले लिया और पदोन्नत कर्मचारियों को रिवर्ट कर दिया। विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद कर्मचारियों को फिर से अपने पुराने पदों पर लौटना पड़ा। वहीं, अन्य पदोन्नत कर्मचारियों के मामलों की स्क्रूटनी अभी भी जारी है। इस फैसले के बाद प्रभावित कर्मचारियों और उनके परिवारों में निराशा का माहौल है।

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सीपीसीटी और कंप्यूटर डिप्लोमा बना सबसे बड़ा कारण

रिवर्ट आदेश के अनुसार, सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए हायर सेकेंडरी के साथ एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा और सीपीसीटी परीक्षा पास होना अनिवार्य है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के निर्देशों के पालन में यह पाया गया कि पदोन्नत हुए भृत्यों और चौकीदारों के पास यह आवश्यक योग्यता नहीं थी। इसी वजह से सभी कर्मचारियों की पदोन्नति निरस्त कर उन्हें पुराने पदों पर भेज दिया गया।

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अधिकारियों ने बताया आगे का रास्ता

एमएसएमई कमिश्नर दिलीप कुमार ने कहा कि सीपीसीटी और कंप्यूटर डिप्लोमा की अनिवार्यता के कारण ही कर्मचारियों को रिवर्ट किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो वर्ष की मोहलत केवल अनुकंपा नियुक्ति वाले मामलों में दी जाती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी में पदोन्नति के लिए पद आरक्षित हैं। अगर संबंधित कर्मचारी सीपीसीटी और कंप्यूटर डिप्लोमा की योग्यता पूरी कर लेते हैं, तो भविष्य में उनकी पदोन्नति पर फिर से विचार किया जा सकेगा।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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