सोहागपुर में पहली बार निकली भगवान जगन्नाथ की पूर्ण रथ यात्रा,जयघोष और भक्ति में डूबा पूरा नगर
सोहागपुर में गुरुवार को धार्मिक आस्था, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। नगर के इतिहास में पहली बार भगवान श्री जगन्नाथ की पूर्ण रथ यात्रा भव्य और पारंपरिक स्वरूप में निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे मार्ग पर भगवान श्री जगन्नाथ के जयघोष, भजन-कीर्तन तथा भक्तों की उमड़ी आस्था ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की जुबां पर गूंज रहा भजन 'तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले...' लोगों की श्रद्धा का केंद्र बना रहा। पूरे शहर में भक्ति और उल्लास का अनूठा माहौल देखने को मिला।
राम-जानकी मंदिर से शुरू होकर मिश्र जी के मंदिर पहुंची यात्रा
शारदा सेवा संघ के तत्वावधान में आयोजित यह पूर्ण रथ यात्रा भगवान श्री जगन्नाथ के मौसी घर में सात दिवसीय विश्राम के बाद रामगंज वार्ड स्थित श्री राम-जानकी मंदिर से शुरू हुई। रथ यात्रा स्टेट हाईवे, वाटिका पेट्रोल पंप, कोर्ट चौराहा, पलकमती नदी पुल, पुराना थाना और पुराना अस्पताल रोड होते हुए बिहारी चौक स्थित श्री मिश्र जी के मंदिर पहुंची। यहां भगवान श्री जगन्नाथ की विधिवत पूजा-अर्चना और महाआरती संपन्न हुई।
पूरे मार्ग पर हुआ श्रद्धालुओं का स्वागत
रथ यात्रा के दौरान विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने श्रद्धालुओं का जगह-जगह स्वागत किया। यात्रा मार्ग पर केले, मिश्री, शीतल जल सहित अन्य सामग्री का वितरण किया गया। मंशा देवी मंदिर के सामने नगर परिषद के कर्मचारियों ने भी जल सेवा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। यात्रा के साथ चल रहे वाहन से पूरे मार्ग में परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं के बीच लगातार खिचड़ी प्रसाद वितरित किया गया। वहीं, श्री मिश्र जी के मंदिर में महाआरती के बाद खिचड़ी, रसगुल्ला, फ्रूटी और अन्य मिष्ठान का प्रसाद भी बांटा गया।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु, मातृशक्ति ने किया नृत्य
रथ यात्रा के दौरान मार्ग में आने वाले मंदिरों और घरों के बाहर श्रद्धालुओं ने भगवान श्री जगन्नाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। भगवान जगन्नाथ के भजनों और भक्तिमय गीतों पर विशेष रूप से महिलाओं ने उत्साह के साथ नृत्य किया। पूरे मार्ग पर श्रद्धा, सेवा और धार्मिक उल्लास का अनूठा दृश्य देखने को मिला। पहली बार निकली इस पूर्ण रथ यात्रा ने सोहागपुर में धार्मिक परंपरा का नया अध्याय जोड़ दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी और सामाजिक संगठनों के सहयोग से यह आयोजन श्रद्धा, सेवा और सामूहिक आस्था का प्रतीक बन गया।
Edited By - Sona Rajput














