PU Special :मध्यप्रदेश में सिंहस्थ से पहले होम स्टे की बढ़ी डिमांड, उज्जैन में सबसे ज्यादा 160 घर रजिस्टर्ड

अशोक गौतम,भोपाल। राजधानी के कोलार निवासी प्रशांत मिश्रा हाल ही में उज्जैन महाकाल लोक का भ्रमण करने गए थे। इन्होंने वहां ठहरने के लिए होटल की तलाश की, लेकिन उन्हें पांच हजार रुपए से कोई होटल नहीं मिल रहे थे। इन्होंने शहर के पास मेडिया गांव में होम स्टे का सहारा लिया। होम स्टे यहां उन्हें परिवार के दो हजार रुपए में रुकने और खाने-पीने का इंतजाम हो गया। इस तरह से अकेले प्रशांत नहीं महीने में यहां सौ से ज्यादा लाेग प्रति माह होम स्टे का सहारा लेते हैं।
ठहरने और भोजन की सुविधा मिल रही
सिंहस्थ को देखते हुए प्रदेश में होम स्टे का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए उज्जैन में सबसे ज्यादा 160 घर होम स्टे के रूप में रजिस्टर्ड हो चुके हैं। कई अन्य मकान मालिक भी अपने घरों को होम स्टे के रूप में रजिस्टर्ड कराने के लिए मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड से संपर्क कर रहे हैं। इससे श्रद्धालुओं को ठहरने और भोजन की सुविधा मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया तैयार होगा।प्रदेश में वर्तमान में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर 418 होम स्टे रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 209 होम स्टे ‘मेक माय ट्रिप’ से जुड़े हैं। पर्यटन विभाग अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और माध्यमों से भी होम स्टे को जोड़ने की कोशिश कर रहा है, ताकि इनकी सुविधाओं और उपलब्धता की जानकारी अधिक से अधिक पर्यटकों तक पहुंचाई जा सके।
सात साल में 36 हजार पर्यटक, 6.76 करोड़ की आय
होम स्टे से ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो रहा है। पिछले सात साल में करीब 36 हजार पर्यटक होम स्टे में ठहर चुके हैं। इससे संचालकों को करीब 6.76 करोड़ रुपए की आय हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई संचालक पर्यटकों को स्थानीय भ्रमण के लिए वाहन की सुविधा भी उपलब्ध करा रहे हैं।
नियमों में राहत, अब 10 कमरों तक होम स्टे
होम स्टे को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इस वर्ष नियमों में भी राहत दी है। अब मकान मालिक के आवेदन पर होम स्टे का लाइसेंस देने के लिए पहले की तरह विस्तृत जांच की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा कमरों की सीमा पांच से बढ़ाकर 10 कर दी गई है। इससे अधिक लोगों को अपने घरों को पर्यटन से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
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सोशल मीडिया से गांवों का प्रचार
मप्र टूरिज्म बोर्ड होम स्टे के प्रचार-प्रसार के लिए प्रोफेशनल्स और विद्यार्थियों को भी जोड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज और विभिन्न प्रोफेशनल कोर्स के विद्यार्थियों को ग्रामीण क्षेत्रों के होम स्टे में ठहरने और भोजन की सुविधा दी जाती है। विद्यार्थी ग्रामीण परिवेश और रहन-सहन का अनुभव करने के साथ वहां की गतिविधियों की रील और अन्य सामग्री बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। इससे ग्रामीण पर्यटन और होम स्टे की जानकारी नए वर्ग तक पहुंच रही है।
ग्रामीणों को 40 प्रतिशत, जनजातीय क्षेत्रों में 60प्रतिशत सब्सिडी
ग्रामीण क्षेत्रों में होम स्टे के लिए मकान मालिकों को 40 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। यह सब्सिडी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से दी जाती है। वहीं जनजातीय क्षेत्रों में जनजातीय विकास विभाग द्वारा 60 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। शहरी क्षेत्रों में हाउस होल्डर्स को व्यावसायिक टैक्स में छूट दी जाती है।
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होम स्टे की संख्या बढ़ने की उम्मीद है
'होम स्टे का चलन बढ़ा है। उज्जैन में महाकाल लोक और सिंहस्थ के चलते ज्यादा होम स्टे रजिस्टर्ड हुए हैं। धीरे-धीरे इसकी संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा।'
टी. इलैया राजा, एमडी, मप्र पर्यटन विकास बोर्ड




















